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अद्भुत शिल्पकला से निर्मित है गांवां का काली मण्डा, 400 वर्षो से हो रही पूजा
अदभुद शिल्पकला से निर्मित है गांवां का काली मण्डा, 400 वर्षो से हो रही पूजा

मनोकामना होती है पूरी गांवां(गिरिडीह)| गांवां काली मंडा की भव्यता गिरिडीह जिले भर में प्रसिद्ध है. यह मंडा अदभुद शिल्पकला से निर्मित है जो इसे खूबसूरत बनाती है. इसका निर्माण 18वीं सदी के पूर्वाध में गावां के तत्कालीन टिकेट पुहकरन नारायण सिंह ने कराया था. लगभग 30 मीटर लंबाई एवं 30 फीट ऊंचे मंडप के दीवारों के प्लास्टर के निर्माण में सुर्खी चुना,  बेल का लट्ठा , गुड़, उड़द का पानी शंख एवं शिपियों के पानी के मिश्रण से हुआ था. जिसके कारण मंडप की दीवारें आज के दौर में…

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बिरनी : भरकट्टा में 300 वर्षों हो रही है दुर्गा पूजा, होती हैं मुरादें पूरी
बिरनी : भरकट्टा में 300 वर्षों यहां हो रही है दुर्गा पूजा, होती हैं मुरादें पूरी

बिरनी(गिरिडीह)। ज़िले के बिरनी प्रखंड स्थित भरकट्टा तीन सौ वर्षों से माँ दुर्गा की पूजा होती आ रही है. बताया जाता है कि यहां जो भी लोग मन्नत मांगते है, माँ उनकी हर मुरादें पूरी करती हैं. पूजा के बारे में स्थानीय मुखिया सह दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष राजकुमार नारायण सिंह बताते हैं कि यहां पूजा की शुरुआत कैसे हुई यह तो उन्हें जानकारी नहीं है, लेकिन उनके पूर्वज यहां पूजा करते आ रहे है. इसे भी पढ़ें-जेपी जयंती : श्रद्धापूर्वक याद किये गए लोकनायक जयप्रकाश नारायण बताया कि…

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खोरीमहुआ : यहां मुगलकाल से हो रही दुर्गा पूजा, सभी मनोकामनाएं होती हैं पूरी
खोरीमहुआ : यहां मुगलकाल से हो रही दुर्गा पूजा, सभी मनोकामनाएं होती है पूरी

खोरीमहुआ (गिरिडीह)| खोरीमहुआ अनुमंडल क्षेत्र के देवरी प्रखंड क्षेत्र के किसगो ग्राम में होने वाले दुर्गा पूजा का इतिहास मुगलकाल से जुड़ा हुआ है. बताया जाता है कि यहां स्थापना जयपुर-जोधपुर राजस्थान के सूर्यवंशी क्षत्रिय राजा के वंशज राजा रामरतन सिंह द्वारा संवत 1597 फसली सन 947 मुगलकाल के समय किसगो के पांडेयबागी में मिट्टी का पिंड बनाकर माँ दुर्गा का पूजा आरम्भ किया गया था. बताया जाता है कि राजा रामरतन सिंह के समय से ही खुशियों तथा मनोकामना पूर्ण होने के खुशी में काडा-भेड़ा का बलि प्रथा की…

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