कवि के मन में चल रहे अंतर्द्वंद से निकली वाणी

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“मैं एक समन्दर हूँ”

कवि के मन में चल रहे अंतर्द्वंद से निकली वाणी श्री रामकुमार सिन्हा

मौन मेरे मन का

 

मैं प्रश्न बन जाऊ अगर

उत्तर बनोगे तुम?

मौन मेरे मन का मुझसे पूछता है।

 

मौन के कुछ पूछने का बहन तक मुझको नहीं था,

किन्तु मैं यह जनता हूँ

मौन जब कुछ बोलता है,

शब्द से ही तौलता है

मेरा भारी मन।

 

और मैं बस मूक होकर

ताकता हूँ दूर तक यूँ।

 

मौन का वह प्रश्न तिरता शून्य में है।

 

चाहता हूँ मौन के हर प्रश्न का उत्तर बनूँ मैं,

पर नहीं कुछ बोलती मेरी जुबां है।

मौन के उस प्रश्न पर

फिर मौन हो जाता हूँ मैं।

 

(कवि परिचय – श्री रामकुमार सिन्हा पेशे से तो गिरिडीह नगर निगम का हिसाब किताब रखते हैं, या पद का नाम लें तो बड़ा बाबू हैं, पर मूल रूप से ये एक कवि और कलाकार हैं। छात्र जीवन से ही लेखन में हाथ आजमा रहे रामकुमार सिन्हा एक उम्दा कलाकार भी हैं और इनका पसंदीदा वाद्य यंत्र बाँसुरी है। ” मैं एक समंदर हूँ ” और ” मैंने देखा है जहां ” शीर्षक से अब तक इनकी कविताओं के दो संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, जिन्हें पाठकों ने काफी सराहा भी है।)

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