गिरिडीह की साहित्यिक बिरादरी ने नामवर सिंह को किया नमन, दी श्रद्धांजलि

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वक्ताओं ने कहा – नामवर की परंपरा हमेशा रहेगी कायम

गिरिडीह। गिरिडीह की साहित्यिक बिरादरी के लोगों ने दिवंगत साहित्यकार नामवर सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। स्थानीय पशुपालन विभाग के सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में गिरिडीह की विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं के सदस्यों ने भाग लिया। श्रद्धांजलि सभा का संचालन रितेश सराक ने और धन्यवाद ज्ञापन शंकर पांडेय ने किया।

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कृष्णा सोबती व अर्चना वर्मा को भी श्रद्धांजलि

गिरिडीह की साहित्यिक बिरादरी ने नामवर सिंह को किया नमन, दी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम में सबसे पहले उपस्थित लोगों ने दिवंगत साहित्यकार नामवर सिंह के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि देकर उन्हें नमन किया। इसके बाद उनकी स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया। इसके साथ ही पिछले दिनों दिवंगत हुईं साहित्यकार कृष्णा सोबती और अर्चना वर्मा की स्मृति में भी मौन रखा गया।

हिन्दी साहित्य के सुपरस्टार थे नामवर

गिरिडीह की साहित्यिक बिरादरी ने नामवर सिंह को किया नमन, दी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम में अपनी शब्दांजलि देते हुए स्थानीय साहित्यप्रेमियों ने अपने अपने तरीके से भारतीय साहित्य जगत में नामवर सिंह के योगदान पर चर्चा की। इस चर्चा में जनवादी लेखक संघ, नारायणी साहित्य अकादमी, राष्ट्रीय कवि संगम सहित कई संस्थाओं के सदस्यों ने भाग लिया। सभी ने नामवर सिंह के निधन को भारतीय साहित्य जगत की अपूर्णनीय क्षति बताते हुए कहा कि हिन्दी साहित्य और आलोचना का युग का अवसान हुआ है। लेकिन उनके कृतित्व और व्यक्तित्व की चमक हमेशा बनी रहेगी। नामवर सिंह के नहीं रहने पर भी उनकी उपस्थिति हमेशा हिन्दी साहित्य की दुनिया में बरकरार रहेगी। वक्ताओं ने कहा कि नामवर हिन्दी के शलाका पुरुष थे और उनका स्थान कोई नहीं ले सकता है। वाचिक परंपरा के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण थे नामवर। वह हिन्दी साहित्य के सुपरस्टार थे।

नाम और काम दोनों में थे नामवर

उदय शंकर उपाध्याय ने कहा कि अपनी मेहनत और प्रतिभा से अपने नाम को सार्थक करने वाले समन्वयवादी शीर्षस्थ साहित्यकार थे नामवर सिंह। मोइनुद्दीन शमसी ने नामवर सिंह को हिंदी साहित्य का जज बताते हुए कहा कि उनकी पैनी निगाह सब पर रहती थी‌। बद्री दास ने कहा कि नामवर जी ने अपनी समालोचना से कई नई प्रतिभाओं को तराश कर सोना में तब्दील कर दिया। शंकर पाण्डेय ने नामवर सिंह को प्रगतिशील धारा का एक मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा कि स्वस्थ आलोचना की परंपरा को निभाकर ही हम उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं। डॉ अनुज कुमार ने कहा कि नामवर जी ने हिन्दी आलोचना की दशा और दिशा ही बदल दी। उन्होंने खुलासा किया कि उनका सौभाग्य है कि कॉलेज की नौकरी के लिए उनका साक्षात्कार नामवर सिंह ने ही लिया था।

डॉ पूनम कुमारी ने कहा कि नामवर जी ने साहित्यिक परम्परा का जो पौधारोपण किया है, उसे हमें नए नए फूल उगाकर आगे बढ़ाना है। ममता बनर्जी मंजरी ने नामवर सिंह की उस बात का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि समालोचना रचनाकार को आगे बढ़ाता है। इससे घबराना नहीं चाहिए। महेश अमन ने हिन्दी जगत को बनारसी शैली में रंग देने को नामवर सिंह का सबसे बड़ा योगदान बताया। परवेज शीतल ने कहा कि नामवर जी हमेशा कहते थे कि पहले किसी विषय को जानो, पढ़ो, समझो और फिर उस पर अपनी राय दो।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में लवलेश वर्मा, संजीव कुमार, भास्कर सहित कई लेखक और साहित्यप्रेमी शामिल हुए।

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