जवानों की शहादत पर भारत के पुरुषार्थ को ललकारती साक्षी की वाणी

जवानों की शहादत पर भारत के पुरुषार्थ को ललकारती साक्षी की वाणी
  •  
  •  
  •  
  •  
  • 12
  •  
  •  
    12
    Shares

हे भारत

जवानों की शहादत पर भारत के पुरुषार्थ को ललकारती साक्षी की वाणी       साक्षी कुमारी

हे भारत त्रिनेत्र खोलो।

मौन हो क्यों कुछ तो बोलो।।

रक्त की बहती है सरिता,

रामायण छोड़ो, आरंभ करो गीता,

तुम राम भी, मर्यादा का अनुपम रूप

तुम शिव भी, रूद्र का भयंकर स्वरूप

तुम शारदा भी ज्ञान देते हो,

तुम कालिका भी, तलवार अपनी तान देते हो

तुम वो कृष्ण हो जो मधुर वंशी बजाते हो

तुम वो विष्णु भी जो अर्जुन को धर्म का

उपदेश सुनाते हो

कोई शायद तुम्हारी सुनता नहीं है

पर जब अस्त्र तुम्हारे कहने लगे तो सारे

शब्द मौन हो जाते हैं

तो फिर अत्याचार को

मर्यादा के पलड़े पे मत तौलो

हे भारत त्रिनेत्र खोलो।

विनाश कर डालो उनका जो तुमको सताते हैं

जब भी शांति की बात करते हो रोकने जाते हैं

कब तक सहोगे ये सब, चलो

उनको मौत का फरमान सुना आते हैं

जल्दी करो वो शहीद इंतजार करते हैं

हम भी अपने वतन से इतना ही प्यार करते हैं

दुश्मन को बताओ तुम्हें रोना ही होगा,

भावनाएं हमारी शक्ति हैं,

तुम्हें लाशों का बोझ ढोना ही होगा,

एक दिन मौत की नींद सोओगे

भले ही आज चैन की नींद सो लो

हे भारत त्रिनेत्र खोलो..।।

 

(कवयित्री का परिचय – इस कविता की कवयित्री साक्षी कुमारी अभी नवम कक्षा की छात्रा हैं। दिव्यांग होने के बावजूद  बुलंद हौसले की मलिका साक्षी काफी तीक्ष्ण बुद्धि हैं और साहित्य से इनका गहरा लगाव है। पुलवामा हमले के बाद जब पूरे देश में भावनाएं उबाल पर हैं, ऐसे में साक्षी ने इस कविता के माध्यम से न सिर्फ अपनी भावनाएं प्रकट की हैं, बल्कि सत्ताधीशों को संदेश देने का भी प्रयास किया है)

ख़बरों से अपडेट रहने के लिए जुड़े हमारे व्हाट्सएप ग्रुप एवं फेसबुक पेज से….