फूहड़ गानों से मनी सरस्वती पूजा, गायब दिखे धर्म के ठेकेदार

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गिरिडीह। विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा में इस बार मंत्रों व भजनों की आवाज़ कम और फूहड़ता भरे अश्लील गानों के कानफाड़ू शोर ज़्यादा सुनाई पड़े। यूं कहें तो पूजा पंडालों में सरस्वती पूजा नहीं कुछ और ही चल रहा हो। हालात ये रहे कि कई परिवार लज्जा महसूस कर दर्शन करने घर से ही नहीं निकले। कुछ एक जगहों को छोड़ दें तो गली-मोहल्लों में हुए पूजा के दौरान लगभग हर जगह अश्लील और भड़काऊ गानों का शोर ही सुनाई पड़ा। वहीं कुछ विद्यालयों में भी मस्ती के नाम पर फूहड़ गानों पर बच्चों को डांस करवाने का नज़ारा भी देखने को मिला। ऐसे में यह दृश्य तथाकथित धर्म के ठेकेदारों को करारा तमाचा है।

एक तरह जहां अब से ठीक दो दिन बाद वैलेंटाइन डे के मौके पर शहर में काफी संख्या धर्म और संस्कृति के रक्षक पश्चिमी सभ्यता के विरोध में सड़कों पर उतरे दिख जाएंगे। लेकिन बड़ा सवाल यह कि आखिर पूजा के मौके पर अश्लीलता फैलाये जाने पर ये धर्म रक्षक कहां गायब हो जाते हैं? क्या केवल वैलेंटाइन डे का विरोध और प्रेमी जोड़ों को पकड़ कर दंडित करना ही संस्कृति की रक्षा है? जरूरत है आगे आकर पूजा के नाम पर अश्लीलता पड़ोसने वालों पर रोक लगाने की तभी धर्म संस्कृति की वास्तविकता में रक्षा हो पाएगी।

प्रशासन ने नहीं दिखाई सख्ती

पिछले साल की बात करें तो साउंड सिस्टम को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए थे। प्रशासनिक आदेश के तहत 60 डेसिबल में ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग करने एवं अश्लील और भड़काऊ गाने को बजाने पर पूर्णतः प्रतिबंध का आदेश जारी किया गया था। कई जगहों में नियम का पालन नहीं करने पर साउंड सिस्टम को जब्त भी किया गया था। लेकिन इस बार ख़ास सख्ती नहीं देखी गई जिसके कारण पूजा पंडालों में जमकर नियमों की धज्जियां उड़ती दिखी।

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