महागठबंधन की गणित में कांग्रेस के हिस्से जीरो, दिग्गज हो सकते हैं वंचित

महागठबंधन की गणित में कांग्रेस के हिस्से जीरो, दिग्गज हो सकते हैं वंचित
  •  
  • 5
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    5
    Shares

रिपोर्ट : अभय वर्मा

गिरिडीह। महागठबंधन के तय फार्मुले में आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के जिम्मे केवल सहयोगियों की जीत में लंबी लकीर खिंचने की रह जाएगी। आलाकमान के निर्णय से गिरिडीह में खलबली मची है। पार्टी में कई सुरमा हैं, जिन्हें टिकट की आस थी। पर गठबंधन धर्म के चक्कर में कांग्रेस की झोली संभवतः खाली ही रह जाएगी। तय रणनीति के तहत विगत चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार ही इस बार चुनावी मैदान में उतरेंगे। विगत चुनाव में लोकसभा और विधानसभा, किसी भी सीट पर कांग्रेस को दूसरा स्थान हासिल नहीं हुआ था।

लोकसभा चुनाव में गिरिडीह जेवीएम के हिस्से गई थी तो कोडरमा में पार्टी उम्मीदवार की दुर्गति हो गई थी। यही हाल विधानसभा चुनाव में भी रही। गांडेय विस में पार्टी के उम्मीदवार रहे सरफराज अहमद को सम्मानजनक वोट मिला पर वह तीसरे स्थान पर फिसल गए थे। वहीं बगोदर, धनवार व डुमरी में कोई भी उम्मीदवार चार हजार का आकंड़ा भी पार नहीं पाए थे। बगोदर विस में इंडियन आइडल की फाइनालिस्ट रही पूजा चटर्जी भी वोट लाने के मामले में हांफती नजर आयी थीं। उन्हें तीन हजार भी मत नहीं मिला था।

अध्यक्ष के पत्र ने मचायी खलबली

महागठबंधन की गणित में कांग्रेस के हिस्से जीरो, दिग्गज हो सकते हैं वंचित

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा अजय कुमार के एक पत्र ने गिरिडीह कांग्रेस में खलबली मचा दी है। 3 जनवरी को जोनल कोआर्डिनेटर को लिखे पत्र में डा कुमार ने संगठन मजबूती का निर्देश दिया है। जिसमें कोडरमा व गिरिडीह का कोई जिक्र नहीं किया गया है।

इसे भी पढ़ें-कांग्रेस के गिरिडीह व कोडरमा सीट छोड़ने की खबर से कार्यकर्ता निराश : सचिदानंद

जानकारी के अनुसार जोनल कोआर्डिनेटर रमा खलको को लोहरदगा व गुमला, अशोक चौधरी को धनबाद व बोकारो, केशव महतो कमलेश को हजारीबाग व रामगढ़, सुलतान अहमद को दुमका व देवघर तथा भीम कुमार को पलामू व गढ़वा की जिम्मेवारी दी गई है। पार्टी के जिलाध्यक्ष सारी हकीकत से वाकिफ हैं, पर पार्टी बिखरने के भय से इसका कार्यकर्ताओं के बीच खुलासा नहीं कर रहे हैं।

क्या झामुमो और कांग्रेस में होगा दोस्ताना संघर्ष

सूत्र की मानें तो महागठबंधन के सीट बंटवारे पर अंतिम मुहर लगनी बाकी है। झामुमो कांग्रेस से अलग राह तलाशती है तो पार्टी को यहां टिकट की आस रहेगी। पर जेवीएम कांग्रेस के साथ रही तो गिरिडीह, धनवार में भी टिकट की आस पाल रखे नेताओं को परेशानी होगी। विदित हो कि दोनो विस सीट पर जेवीएम कांग्रेस से बेहतर स्थिति में रही थी।

संसदीय चुनाव में भी कोडरमा व गिरिडीह सीट पर जेवीएम कांग्रेस से बेहतर करने में सफल रही थी। गांडेय में कांग्रेस का दावा मजबूत नजर आता है। यह स्थिति तभी रहेगी जब झामुमो कांग्रेस से अलग रहे। यहां सवाल यह भी है कि झामुमो व कांग्रेस के बीच चुनावी सहमति बरकरार रही तो क्या गांडेय में दोस्ताना संघर्ष होगा। पार्टी के लिए अखंड बिहार के प्रदेश अध्यक्ष रहे सरफराज अहमद का टिकट काटना आसान नहीं होगा। फिलहाल सभी अनुमान भविष्य के गर्भ में छिपा है।

ख़बरों से अपडेट रहने के लिए जुड़े हमारे व्हाट्सएप ग्रुप एवं फेसबुक पेज से….