सिद्ध संत कहीं आते-जाते नही, अपितु अपने भक्तों के पास ही रहते हैं: साध्वी ज्ञानानंद

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कबीर ज्ञान मंदिर में सद्गुरु विवेक साहब निर्वाण महोत्सव, उमड़ी भक्तों की भीड़

गिरिडीह। शहर के सिरसिया स्थित श्री कबीर ज्ञान मंदिर में सद्गुरु विवेक साहब निर्वाण महोत्सव सह गुरु गोविंद धाम स्थापना दिवस का दो दिवसीय कार्यक्रम गुरुवार की सुबह कबीर साहब रचित बीजक महाग्रंथ के अखंड पाठ से शुरू हुआ। जिसमें सैंकड़ों की संख्या में भक्त शामिल हुए। इस दौरान करीब चार घंटे तक सस्वर, सुमधुर पाठ से वातावरण गुंजायमान हो उठा। वहीं दोपहर के बाद भवन के विशाल हॉल में बाहर से आए संतो द्वारा प्रवचन दिये गये। इस दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा भगवत प्रेम से सराबोर करने वाले कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई।

शुक्रवार को होगा समाधि स्थल का दर्शन

सिद्ध संत कहीं आते-जाते नही, अपितु अपने भक्तों के पास ही रहते हैं: साध्वी ज्ञानानंद

मौके पर मौजूद श्री कबीर ज्ञान मंदिर से जुड़े अरूण माथुर ने बताया कि महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को सुबह से ही ब्रह्मलीन संत सद्गुरु विवेक साहब की पावन समाधि का पूजन होगा। समाधि पूजन के बाद विभिन्न राज्यों से आये भक्त कतारबद्ध तरीके से समाधि स्थल का दर्शन करेंगे। बताया कि इस अवसर पर नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा ईश्वर प्रेम से सराबोर करने वाले और संतों की महिमा बताने वाली सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाट्य मंचन व भाव नृत्य की प्रस्तुति की जाएगी। साथ ही कार्यक्रम का मुख्य केंद्र परम वंदनीय सद्गुरु ज्ञान दिव्य प्रवचन संदेश होगा। वहीं शाम को गिरिडीह एसपी द्वारा साध्वी ज्ञानानंद जी के नवीनतम कृति श्रीमद भगवत गीता की भाषा टीका खंड 5 का विमोचन किया जायेगा।

कई इलाकों से पहुंचे भक्त

महोत्सव में गिरिडीह के स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावे बाहर से आने वाले लोगों का तांता लगा रहा। गुरुवार को भी झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावे बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से विवके साहब के अनुयायियों का आना लगातर जारी था।

समाधि मंदिर अलौकिक ऊर्जा को करती है धारण

सिद्ध संत कहीं आते-जाते नही, अपितु अपने भक्तों के पास ही रहते हैं: साध्वी ज्ञानानंद

कार्यक्रम के दौरान संदेश देते हुए श्री कबीर ज्ञान मंदिर की मुख्य संस्थापिका साध्वी ज्ञानानंद जी ने कहा कि प्रत्येक वर्ष परम पूज्य गुरुदेव सद्गुरु विवेक साहब जी स्वधामगमन दिवस के याद में मनाया जाता है। कहा कि सिद्ध संत अपना पंच भौतिक चोला का त्याग कर विराट में समा जाते हैं, वे कहीं आते-जाते नहीं अपितु अपने भक्तों के पास ही रहते हैं। श्री कबीर ज्ञान मंदिर के पावन परिसर में उनकी ऊर्जा घनीभूत है, लेकिन आज का दिवस कुछ विशेष है। परिसर में स्थित समाधि मंदिर आज अलौकिक ऊर्जा को धारण करती है। जिसका अनुभव यहां आने वाले भक्त श्रद्धालुजनों को सहज ही होता है। कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से पावन समाधि और गुरु गोविंद के समक्ष श्रद्धा सुमन अर्पित करता है, उनकी बिन मांगे ही सभी मुराद पूरी हो जाती है।

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