चने की खेती से लहलहाये डुमरी के खेत, किसानों के चेहरे पर छाई खुशहाली

चने की खेती से लहलहाये डुमरी के खेत, किसानों के चेहरे पर छाई खुशहाली
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कृषि विभाग की मदद से किसानों ने पहली बार की चने की खेती

रिपोर्ट: दिनेश कुमार

डुमरी(गिरिडीह)। जिले के डुमरी प्रखंड के सिमराडीह व जोल्हाड़ीह गांव के किसानों में खेती के प्रति रूचि लगातार बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि पहली बार डुमरी प्रखंड के कई गांव के खेत चने की खेती से लहलहा रहे हैं। चने की खेती करने के लिये किसानों को प्रेरित करने में प्रखंड के बीटीएम मुकेश कुमार का अहम योगदान रहा है। उन्होंने न सिर्फ किसानों को चने की खेती करने के लिये प्रेरित किया बल्कि किसानों को मुफ्त में चना का बीज देकर कृषि की ओर किसानों का रुझान बढ़ाने के लिए सफल प्रयास किया है। परिणाम स्वरूप खेतों में सिंचाई की चिंता किये बिना लगभग 50 से 70 एकड़ में किसानों ने चने की फसल लगायी है। जहां तक पटवन की बात है तो किसान  पम्पसेट के माध्यम से अपने घर के कुओं से खेतों तक पानी उपलब्ध करवा कर रहे हैं।

क्या कहते हैं इलाके के किसान

चने की खेती से लहलहाये डुमरी के खेत, किसानों के चेहरे पर छाई खुशहाली

खेतों में लगी चने की फसल के बारे महिला कृषक सोमरी देवी का कहना है कि सभी किसानों ने मिलकर पहली बार अपने-अपने खेतों में चने की खेती की है, जो काफी बेहतर ढंग से हुआ है। कहा कि चने की खेती के लिए उन्हें कृषि विभाग द्वारा मुफ्त में बीज उपलब्ध कराया गया था। कृषकों की माने तो उनके क्षेत्र में रोजगार का कोई साधन नहीं है। ऐसे में खेतो में हरियाली आने से सभी काफी खुश हंै और उन्हें उम्मीद है कि चने को बेच कर वे अपनी आर्थिक विपन्तता को दूर करेंगे।

बीटीएम के प्रयास से ही खेतों में आई हरियाली

पंचायत के सरपंच सह पंचायत समिति सदस्य विवेक कुमार का कहना है कि यहां की हरियाली देखकर वे भी काफी खुशी महसूस कर रहे हंै। कहा कि इस इस हरियाली का  सारा श्रेय डुमरी बीटीएम मुकेश कुमार को जाता है, क्योंकि वह किसानों में कृषि के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए मुफ्त में चना का बीज देकर समय-समय पर खुद खेत मे आ कर सफल खेती के लिये किसानों को प्रशिक्षित करते रहते थे। जिसके परिणामस्वरूप ही आज खेतों में हरियाली देखने को मिल रही है।

किसानों को मिलेगी 1800 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि

यहां के किसानों की मेहनत को देखते हुए बीटीएम मुकेश कुमार ने राइस फेलो योजना का लाभ देने की बात कही। जिसमंे प्रत्येक किसान को उनके बैंक खाते में प्रति एकड़ 1800 रुपये कृषि विभाग द्वारा प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वहीं चने की खेती की समाप्ति के बाद इन किसानों के बीच गरमा मूूंग का बीज मुुफ्त में उपलब्ध कराया जायेगा, ताकि किसान अपने खेत में कई फसलों की खेती कर आमदनी बढ़ा सकें।

12 महीना खेती कर किसान दूर कर सकते हैं आर्थिक विपन्नता

डुमरी बीटीएम मुकेश कुमार का कहना है कि कृषि को बढ़ावा देने के लिये वे हमेशा किसानों को कृषि के प्रति जागरुक करते रहे हैं। कहा कि किसानों को चना की खेती करने के लिये प्रेरित करने के साथ ही उन्हें मुफ्त में बीज देकर चने की खेती कराई। यहां तक कि वे स्वयं समय-समय पर किसानों के खेत में जाकर किसानों को उन्नत कृषि के लिये प्रशिक्षित भी करते थे। कहा कि किसान अगर 12 महीना खेती करें तो उनकी आर्थिक विपन्नता स्वयं समाप्त हो जाएगी।

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