अब जेब के अनुरूप खरीद पाएंगे गैस, सरकार और एजेंसियां ला रही है नयी तकनीक

अब जेब के अनुरूप खरीद पाएंगे एलपीजी गैस, सरकार और गैस एजेंसियां ला रही है नयी तकनीक
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत देश के अधिकांश परिवारों तक एलपीजी की पहुँच तो कर दी है, लेकिन इनमें से अधिकतर परिवार हर माह एलपीजी खरीदने में अब भी लाचार हैं।  खासकर वैसे परिवार जो बीपीएल में शामिल हैं और उनका मासिक बजट कम है। ऐसे परिवारों को हर माह 800-900 का एलपीजी पर खर्च करना काफी महंगा पड़ रहा है। इन गरीब परिवारों की समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार अब एक नई तकनीक का इस्तेमाल करने वाली है। इसके अनुसार अब जेब के मुताबिक एलपीजी खरीद सकते हैं।  दरअसल वर्तमान में ग्राहकों को गैस एजेंसी के द्वारा 14.2 और 5 किग्रा के सिलेंडर उपलब्ध कराए जाते हैं।

पेट्रोलियम मंत्री ने एजेंसियों से मांगे थे सुझाव

सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए कई एजेंसियों से बात की थी। जिनमें टाटा इनोवेशन ने सरकार को एक बेहतरीन विकल्प सुझाते हुए ग्राहकों के लिए जेब के अनुरूप एलपीजी देने का प्रावधान करने की बात कही है।  टाटा इनोवेशन के इस सुझाव को पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने गंभीरता से लेते हुए गैस एजेंसियों को ऐसी व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।

आइआइटी के छात्र ने विकसित की है तकनीक

भुवनेश्वर के आइआइटी में अध्ययनरत एक छात्र ने ऐसी तकनीकी भी विकसित कर ली है, जिससे गैस एजेंसियों द्वारा ग्राहकों को उनके मनमुताबिक एलपीजी दी जा सके। इस तकनीक को सस्ता करने की दिशा में और अधिक प्रयास किये जा रहे हैं।

नयी तकनीक से दूर होगी उपभोक्ताओं की समस्या : प्रधान

पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बताया कि कम बजट वाले गरीब परिवार वर्तमान में महँगी गैस खरीदने में असमर्थ हैं, ऐसे परिवारों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार इस तकनीक को लागू करना चाह रही है। कहा कि जल्द ही ग्राहकों को इस तकनीक के माध्यम से एलपीजी गैस दी जा सकेगी।

उन्होंने एक दूसरा संकेत देते हुए बताया की आने वाले दिनों में बायोमास का इस्तेमाल प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत दिए जाने वाले सिलेंडर में गैस भरने के लिए किया जा सकता है। बायोमास के इस्तेमाल से गैस एजेंसियों और सरकार पर अधिक बोझ नहीं पड़ेगा और यह व्यवस्था वर्तमान से काफी सस्ती होगी।

सरकार ने यह साफ नहीं किया है की इस तकनीक को सुचारू कब से किया जायेगा।  यानि अभी तक यह गैस एजेंसियों पर ही निर्भर है।  वहीं गैस एजेंसियों की मानें तो इस तकनीक के लागू होने में अभी काफी वक्त है।  अभी तक यह तय नहीं हो पाया है की इस तकनीक से मौजूदा सिलेंडर में ही गैस भरने की व्यवस्था होगी या इसके लिए कोई दूसरी व्यवस्था की जाएगी।  हालाँकि सरकार और गैस एजेंसियों द्वारा नए सिलेंडर तैयार नहीं करने के संकेत जरुर दे दिए हैं।

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