मोदी सरकार का बजट सिर्फ चुनावी घोषणा पत्र : जयशंकर
झारखंड राजनीति

रांची : मोदी सरकार का बजट सिर्फ चुनावी घोषणा पत्र : जयशंकर

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बजट पर आम आदमी पार्टी झारखण्ड के प्रदेश संयोजक जयशंकर चौधरी की टिप्पणी

रांची । आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक जयशंकर चौधरी ने मोदी सरकार के द्वारा पेश किये गये अंतरिम बजट को चुनावी घोषणापत्र करार दिया है। उन्होंने कहा कि पूरे बजट भाषण के दौरान मोदी सरकार का ये अंतरिम बजट, बजट कम चुनावी घोषणापत्र ज्यादा लगा है।  सरकार ने सिर्फ आकड़ों के जरिये अपनी पिछली 4 साल की उपलब्धियां गिनाने की कोशिश की जो की धरातल पर कभी नज़र ही नहीं आयी। बजट में शिक्षा और स्वास्थय क्षेत्र की पूरी तरह से अनदेखी की गयी।

झारखण्ड को कुछ नहीं मिला

झारखण्ड जैसे राज्य में जहां शिक्षा और स्वास्थ्या की स्थिति काफी दयनीय है, जहां गरीबी और भुखमरी देश के सभी सबसे राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा है। वैसे झारखण्ड को इस बजट ने पूरी तरह से निराश किया। 2014 के बजट में 100 स्मार्ट सिटी का जुमला दिया गया था जिसका जिक्र तक इस बजट में नहीं किया गया, बल्कि 1 लाख डिजिटल गावों का नया जुमला सुना दिया गया। 2030 तक के लिए सिर्फ लुभावने सपने दिखाए गए। रोजगार पैदा करने की कोई ठोस घोषणा नहीं आयी।

बावजूद इसके बेरोजगारी 45 साल के इतिहास में सबसे ज्यादा है। सोशल जस्टिस के फण्ड में भी भारी कटौती की गयी जो बिलकुल ही गलत है। गरीबों और किसानो के लिए नयी घोषणाएं की गयी जो की एक चुनावी घोषणा से ज्यादा नहीं नजर आती। महंगाई को गलत आकड़ों से कम दिखने की कोशिश की गयी, जबकि आम जनता महंगाई से 5 साल पूरी तरह त्रस्त रही। कुल मिलाकर सिर्फ मतदाताओं को चुनावी वर्ष में झूठे सपने दिखाए गए।

मजदूरों, किसानों और युवाओं को छला गया

असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की लिए जो पेंशन स्कीम की घोषित हुई, वह मजदूरों को पेंशन तो 60 साल में देगी, लेकिन 31 साल तक प्रतिमाह उसकी जेब से 100 रुपया वसूल करेगी। पेंशन देने की आड़ में दिहाड़ी मजदूर की आय का हिस्सा ही सरकार उसकी जेब से निकालेगी। इस बजट में रोजगार के सवाल पर बिल्कुल चुप्पी साध बेहद बेशर्मी से कहा गया है कि भारत में रोजगार खोजने वाले (जॉब सीकर्स) अब रोजगार देने वाले (जॉब क्रियेटर्स) बन चुके हैं।

भारी बेरोजगारी से जूझ रहे देश के युवाओं का यह बेहूदा तरीके से अपमान किया गया है। 5 एकड़ से कम के किसानों के लिए 6000 रुपए सालाना अनुदान राशि देने की बात बजट में है। अनुदान के लिए कुछ रुपये इसलिए खर्च किए गए हैं ताकि देश की जनता को भ्रमित किया जा सकें और उनका वोट हासिल किया जा सकें। सब मिला जुला कर कहा जाए तो यह बजट चुनावी बजट है और इससे देश की जनता का कोई भला नहीं होने जा रहा है, यह केवल और केवल वोट लेने हेतु जाल बुना गया है।

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