गुप्तेश्वर पांडेय बने बिहार के डीजीपी, शुक्रवार को करेंगे पदभार ग्रहण
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गुप्तेश्वर पांडेय बने बिहार के डीजीपी, शुक्रवार को करेंगे पदभार ग्रहण

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1987 बैच के आइपीएस अधिकारी हैं नये डीजीपी

पटना।  1987 बैच के आइपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय बिहार के नए डीजीपी बनाए गए हैैं। गृह विभाग द्वारा गुरुवार को अधिसूचना जारी की गई है। डीजीपी के.एस. द्विवेदी गुरुवार को रिटायर हो गए है। उनके सेवानिवृत होते ही गुप्तेश्वर पांडेय शुक्रवार से बिहार के डीजीपी के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। बिहार पुलिस एकेडमी के पहले महानिदेशक का पदभार ग्रहण करने के पूर्व वह बीएमपी के डीजी भी रह चुके हैैं। यहां तक कि वह एडीजी (पुलिस मुख्यालय) के पद पर भी काफी दिनों तक काम कर चुके हैैं। गुप्तेश्वर पांडेय पूर्व में झारखंड के चतरा, हजारीबाग के अलावे बिहार के बेगूसराय, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद जिले के एसपी के रूप में काम कर चुके हैैं। मुंगेर, बेतिया और मुजफ्फरपुर में डीआईजी रहे हैैं। इसके अतिरिक्त विशेष शाखा में आईजी भी रहे हैैं।

डीजी टीम का करेंगे गठन

उन्होंने गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जो पुलिसकर्मी काम करेंगे वो पुरस्कृत होंगे और जो काम नहीं करेंगे वो नपे जायेंगे। कहा कि बिहार में पहली बार डीजी टीम गठित करेंगे और पूरी टीम से सलाह लेने के बाद ही जटिल मामलों से जुड़े फैसले लेंगे। उन्होंने जनता के हित को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि पुलिस जनता के लिए काम करेगी और अपराध नियंत्रण व विधि व्यवस्था को दुरूस्त करते हुए जनता और सरकार की कसौटी पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे।

सामाजिक सरोकार के साथ करते हैं पुलिसिंग कार्य

शुक्रवार को नये डीजीपी का पदभार ग्रहण करने वाले गुप्तेश्वर पांडेय सामाजिक सरोकार के साथ ही पुलिसिंग कार्य में यकीन करते है। श्री पांडेय बिहार में विशेष और स्मार्ट पुलिसिंग के लिए जाने जाते है। साथ ही शराब बंदी को लेकर चलाये गये अभियान को सही दिशा और प्रभावी बनाने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत डीजीपी की हुई नियुक्ति

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन व बिहार में नये प्रावधान के तहत डीजीपी की नियुक्ति की गई  है। नये प्रावधान के अनुसार राज्य सरकार के पास सीमित अधिकार है और बिहार कैडर से डीजी रैंक के 12 अफसरों के नाम यूपीएससी को भेजे गये थे, जिनमें से गुप्तेश्वर पांडेय के नाम पर मुहर लगाई गई है। हालांकि यह पहली बार हुआ है कि डीजीपी के निर्णय को लेकर इतना समय लगा है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार अब राज्य में जो भी डीजीपी बनेगे वह अगले दो वर्षों तक इस पद पर काबिज रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन की वजह से भी यूपीएससी और बिहार सरकार के बीच काफी माथापच्ची हुई थी।

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