बिरनी : जमीन मामले में सीओ के फर्जी हस्ताक्षर से आदेश जारी करने का मामला आया सामने

बिरनी : जमीन मामले में सीओ के फर्जी हस्ताक्षर से आदेश जारी करने का मामला आया सामने
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थाना प्रभारी की सतर्कता से मामले का हुआ खुलासा

बिरनी(गिरिडीह)। बिरनी प्रखण्ड में बुधवार को एक चौकाने वाला खुलासा हुआ है। बिरनी बीडीओ सह सीओ संदीप मधेसिया के जगह उनका फर्जी हस्ताक्षर कर काम पर रोक लगाने का निर्देश का पत्र बिरनी थाना को भेजा गया। लेकिन थाना प्रभारी के सतर्कता के कारण उक्त नोटिस फर्जी पाया गया। इतना ही नहीं जब थाना प्रभारी द्वारा उक्त नोटिस की जानकारी बीडीओ सह सीओ को वाट्सप के माध्यम से दिया तो सीओ भी दंग रह गए। बीडीओ सह सीओ संदीप मधेसिया से पूछे जाने पर कहा कि बुधवार को मजिस्ट्रेट के रूप में उनकी ड्यूटी बगोदर में थी।

जिसके कारण वे बगोदर में थे। इस तरह की चिट्ठी निकाला गया है जो गलत व फर्जी हस्ताक्षर का है। जिस खाता प्लॉट पर काम रोकने की बात कही गई है, उसमें रांची हाई कोर्ट का आदेश प्रदीप कुमार राय के पक्ष में है। ऐसे में सीओ काम को रोकने का आदेश कैसे दे सकते है। उक्त जारी नोटिस को तत्काल थाना प्रभारी को मानने से इंकार  करने को कहा। कहा कि इस पत्र को जारी करने में जो दोषी होंगे उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।

क्या है मामला

बिरनी थाना क्षेत्र के बरहमसिया निवासी गिरीश राय व प्रदीप कुमार राय के बीच वर्षों से जमीन विवाद चल रहा था। जिसमें हाई कोर्ट ने जमीन से सम्बंधित निर्णय प्रदीप कुमार राय के पक्ष में सुनाया। जिसके आधार पर प्रदीप कुमार राय उक्त जमीन पर बुधवार को काम करा रहे थे। लेकिन खाता न0 57, प्लॉट न0 58, थाना न0 34, मोजा सिमराधाब में 2 डिसमिल जमीन पर बुधवार को अंचल कर्मियों ने बिरनी अंचल ज्ञांपक 45 दिनांक 16 जनवरी 2019 को उक्त जमीन पर काम को रोकने के लिए फॉर अंचल अधिकारी का हस्ताक्षर कर थाना को पत्र भेजकर काम रोकने का आदेश दिया गया।

थाना को दिए आदेश पत्र में कहा गया कि उक्त खाता प्लॉट में गिरीश राय व प्रदीप कुमार राय के बीच विवाद है। मामला जिला न्यायधीश के न्यायालय में वाद संख्या 87/18 लंबित है। उक्त वाद से सम्बंधित मंतव्य हेतु विद्वान सरकारी अधिवक्ता गिरिडीह के प्राप्त शिकायत पत्रों व प्राप्त वादों को भेजा गया है। साथ ही गिरीश राय द्वारा 15 जनवरी को अंचल कार्यालय में आवेदन भी प्राप्त हुआ है। मंतव्य प्राप्त होने तक उक्त खाता प्लॉट पर अगले आदेश तक कार्य स्थगित रखा जाये। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू माना जाता है। आदेश की प्रतिलिपि गिरीश राय व प्रदीप कुमार राय को भी दिया गया है।

कैसे हुआ मामले का खुलासा

मामले का खुलासा तब हुआ जब विपक्ष गिरीश राय की ओर से लोग थाना पहुंचकर  नोटिस की कॉपी थाना प्रभारी को दिखाकर काम पर रोक लगाने की बात कहने लगे। थाना प्रभारी ने नोटिस को लेते हुये सीओ के हस्ताक्षर पर शक जाहिर किया और इसकी कॉपी मोबाइल के जरिये वाट्सप पर सीओ को भेजा गया। तब जाकर मामले का खुलासा हुआ है। गौरतलब है कि बिरनी प्रखण्ड में जमीन का मामला काफी गम्भीर बना हुआ है। लोगों का कहना है कि एक ही जमीन को कई लोगों के नाम पर रसीद काटा गया है। इतना ही नहीं वर्षो से खाली पड़े गैरमजरूवा जमीन का फर्जी तरीके से कागजात तैयार कर जमीन की खरीद फरोख्त की जा रही है। जिस तरह से अंचल कर्मियों के द्वारा की गई साजिश का खुलासा हुआ है, उसकी अगर उच्च स्तरीय जांच की जाये तो कई अधिकारी जेल की हवा खा सकते है।

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