खोरीमहुआ : यहां मुगलकाल से हो रही दुर्गा पूजा, सभी मनोकामनाएं होती हैं पूरी

खोरीमहुआ : यहां मुगलकाल से हो रही दुर्गा पूजा, सभी मनोकामनाएं होती है पूरी
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खोरीमहुआ (गिरिडीह)| खोरीमहुआ अनुमंडल क्षेत्र के देवरी प्रखंड क्षेत्र के किसगो ग्राम में होने वाले दुर्गा पूजा का इतिहास मुगलकाल से जुड़ा हुआ है. बताया जाता है कि यहां स्थापना जयपुर-जोधपुर राजस्थान के सूर्यवंशी क्षत्रिय राजा के वंशज राजा रामरतन सिंह द्वारा संवत 1597 फसली सन 947 मुगलकाल के समय किसगो के पांडेयबागी में मिट्टी का पिंड बनाकर माँ दुर्गा का पूजा आरम्भ किया गया था.

बताया जाता है कि राजा रामरतन सिंह के समय से ही खुशियों तथा मनोकामना पूर्ण होने के खुशी में काडा-भेड़ा का बलि प्रथा की शुरुआत की गई थी. जो लगभग पाँच वँशो तक चली. इसके बाद  1640-41 में अंग्रेजों के शासन काल में राजा संग्राम सिंह को टिकैत का उपाधि देते हुए जमींदारी प्रदान की गई. साथ ही अंग्रेजों द्वारा काडा भेड़ा के बलि पर रोक लगा दिया गया.

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बावजूद आस्था को लेकर बली प्रथा जारी रही. मगर काड़ा के जगह बकरी की दी जाने लगी. मान्यता है कि राजा रामरतन सिंह के बाद के पीढ़ी के राजा भी धार्मिक आस्था के प्रति सजग थे. जिसके कारण अपने राज्य क्षेत्र में उन्होंने कई धार्मिक स्थल का निर्माण किया. जिसमें बहुचर्चित स्थल माता जमामो का पिंडी का स्थापना  इन्ही के वंशज द्वारा किया जाना माना जाता है.

19 वां वंशज कर रहा पूजा

खोरीमहुआ : यहां मुगलकाल से हो रही दुर्गा पूजा, सभी मनोकामनाएं होती है पूरी

वर्तमान समय में राजा रामरतन सिंह के 19 वां वंशज टिकैत कामख्या नारायण सिंह के द्वारा आज भी पूर्व प्रथा को कायम रखते हुए बड़ी श्रद्धा भक्ति से माँ दुर्गा का पूजा आराधना किया जाता है. साथ ही दुर्गा पूजा में होने वाले खर्च का वहन खुद राजा परिवार के लोग करते है.

सामूहिक चंदे से होती है पूजा

जबकि नवरात्रा पूजा में खुद टिकैत कामख्या नारायण सिंह आज भी पूजा में बैठ कर परम्परा को निभाते आ रहे है. मेला में होने वाले कार्यक्रमों तथा व्यवस्था स्थानीय ग्रामीण तथा किसगो के दुर्गा नाट्य कला परिषद सह व्यवस्था समिति द्वारा अन्य कार्यों को सामूहिक चन्दा के माध्यम से करते आ रहे हैं.

आकर्षक होगी इस बार भी पूजा

इस बार के दुर्गा पूजा को आकर्षक बनाने को लेकर समिति के सदस्यों द्वारा जी तोड़ मेहनत किया जा रहा है. किसगो के पूजा को देखने के लिए 5 कोश के लगभग 50 गाँव के लोग शामिल होते है.  इस वर्ष नवमी में सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा विजयादशमी में भक्ति जागरण का कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा. जिसकी जानकारी व्यवस्थापक समिति के अध्यक्ष रामकिशुन सिंह ने दिया.

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यहां पूजा को सफल बनाने में मदन मोहन सिंह, शरणधर गुप्ता, सुधाकर गुप्ता, जितेंद्र कुमार शर्मा, नकुल सिंह, विपिन सिंह, अभिषेक शर्मा, विद्या भूषण, विश्वनाथ सिंह, प्रमोद प्रताप, मनोज मण्डल, कृष्ण सिंह, उपेंद्र सिंह सहित कई लोग शामिल है.