डॉक्टर-एएनएम मारपीट ने पकड़ा तूल, आपसी झगड़े में बदहाल हुई चिकित्सा सेवा

गिरिडीह : अखाड़े में तब्दील हुआ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केन्द्र, डाॅक्टर व एएनएम भिड़े
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Report : आबिद/ नागेंद्र

दोनों पक्षों ने थाने में दिया आवेदन

गिरिडीह। चैताडीह स्थित सदर अस्पताल का मातृ एवं शिशु यूनिट में गुरुवार को एएनएम और डॉक्टर के बीच हुई मारपीट का मामला थाना पहुंच गया है। दोनों पक्षों ने पचम्बा थाना में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। बता दें कि एक मरीज के इलाज की बात को लेकर दो एएनएम मनोरमा कुमारी और प्रभा कुमारी ने डॉक्टर स्वीटी पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए मारपीट की थी।

बीच बचाव में पहुंची डॉक्टर बबली जया मुर्मू के साथ भी एएनएम के साथ लड़ाई हो गयी थी। जिसके बाद मामला काफी गर्म हो गया था। इस मामले को लेकर दोनों पक्षों ने थाने में आवेदन देकर एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की है। वहीं घटना को लेकर एएनएम संघ और आईएमए ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

डॉक्टर-एएनएम मारपीट ने पकड़ा तूल, आपसी झगड़े में बदहाल हुई चिकित्सा सेवा

मामले को गंभीरता से लेते सीएस तो नहीं होती घटना

इस संबंध में एएनएम संघ की जिला अध्यक्ष नीलम यादव ने बताया कि अक्सर डॉ स्वीटी द्वारा एएनएम लोगों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है और डॉ स्वीटी एएनएम लोगों के साथ गाली गलौज तक करती हैं। वहीं डॉ बबली जया मुर्मू का व्यवहार एएनएम लोगों के प्रति बेहद खराब रहता है। इस बात की शिकायत कई बार सिविल सर्जन को दी जा चुकी है।

कल भी एक मरीज के इलाज की बात कहने पर डॉ स्वीटी ने एएनएम के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया जिसके बाद मामला बिगड़ गया। उन्होंने कहा कि अगर सिविल सर्जन एएनएम की शिकायत को गंभीरता से लेते तो मामला यहां तक नही पहुंचता और मारपीट की नौबत नहीं आती। कहा कि दोनों पक्षों द्वारा पुलिस से शिकायत की गई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

असहज महसूस करते हैं डॉक्टर- डॉ विद्याभूषण

वहीं घटना को लेकर आइएमए के अध्यक्ष डॉ विद्याभूषण ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सिविल सर्जन को मामले की गहन जांच करनी चाहिए और मारपीट पर उतारू दोषी एएनएम के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ज़्यादातर एएनएम का मैनर खत्म हो चुका है। वो सेवा भावना से काम नहीं करके विवादों पर ज़्यादा ध्यान देती हैं। जिस कारण उनकी व्यवहारिकता और मानवता दोनों का पतन हो चुका है।

कहा कि जब वे लोग अपनी सीनियर डॉक्टर का सम्मान नहीं कर सकती हैं तो मरीजों के साथ उनका व्यवहार कैसा हो सकता है, इसका अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है। कहा कि वर्तमान समय मे डॉक्टरों के साथ हो रही हिंसक घटनाओं से डॉक्टर वर्ग काफी असहज महसूस कर रहे हैं। छोटे कर्मियों द्वारा डॉक्टर्स के सम्मान का हनन करने का प्रयास किया जाता है, यही कारण है कि डॉक्टर सरकारी सेवा देने से परहेज करने लगे हैं।

हालांकि उन्होंने बताया कि सरकारी सेवा देने वाले डॉक्टर झारखंड हेल्थ सर्विस एसोसिएशन के सदस्य होते हैं। वे अपने स्तर से एसोसिएशन के पदाधिकारियों से बात करेंगे और मामले की जांच की मांग करेंगे।

राजनीतिक दलों ने भी दी तीखी प्रतिक्रिया

एएनएम और डॉक्टर के बीच हुई मारपीट के मामले में विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी। इस मामले में माले नेता राजेश सिन्हा ने पूरे मामले को लेकर सिविल सर्जन को जिम्मेवार ठहराते हुए इसे उनकी नाकामी बताया। उन्होंने कहा कि सीएस की लापरवाही के कारण पूरी व्यवस्था गड़बड़ है। स्वास्थ्य विभाग में भरष्टाचार और कमीशनखोरी चरम पर है। साथ ही चैताडीह स्थित सदर अस्पताल के केंद्र में अभद्रता भी हावी है।

उन्होंने घटना के पीछे कमीशनखोरी को कारण बताते हुए सीएस से इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की। कहा कि सिविल सर्जन एवं जिला के प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के कारण चैताडीह स्थित चाइल्ड एंड मदर यूनिट में लूट मची हुई है और मरीजों का जमकर दोहन किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से पूरे अस्पताल परिसर में सीसीटीवी कैमरा लगवाने की मांग की है, ताकि वहां कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों की मनमानी पर लगाम लगाया जा सके।

इधर आम आदमी पार्टी के नेता कृष्ण मुरारी शर्मा ने भी घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल से मातृ एवं शिशु यूनिट को चैताडीह शिफ्ट कर देने से जहां एक तरफ मरीजों की परेशानी बढ़ गयी है, वहीं दूसरी तरफ वहां के कर्मियों को मनमानी की आज़ादी मिल गयी है।

किसी भी कर्मी पर विभागीय कंट्रोल नहीं है। उन्होंने चैताडीह अस्पताल के भगवान भरोसे चलने की बात कहते हुए कहा कि न तो वहां सिविल सर्जन जाते हैं और ना ही जिला के कोई अधिकारी ही उस तरफ से गुजरते हैं। जिससे वहां स्वास्थ्य कर्मियों पर कोई लगाम नहीं रह गया है।

झामुमो के जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने भी घटना को अमानवीय करार देते हुए दोषी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कर्मी अपने कर्तव्यों का निर्वाहन पर ध्यान नहीं देते हुए अपने पर्सनल मामले को लेकर आपस मे उलझे रहते हैं। अस्पताल में डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच इस प्रकार की घटना से मरीजों पर भी बुरा असर पड़ता है।

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सीएस ने मामले से झाड़ा अपना पल्ला

इधर इस पूरे मामले को लेकर जब सीएस से बात की गई तो उन्होंने मामले से अपनी अनभिज्ञता जतायी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मी आपस मे उलझे और अपने अपने घर चले गए उन्हें इस मामले से संबंधित कोई जानकारी नही है। जबकि घटना के दिन सीधी नज़र ने सिविल सर्जन से बात की थी तब उन्होंने मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की बात कही थी।

बहरहाल, गिरिडीह सदर अस्पताल अपने कुव्यवस्था के कारण हमेशा सुर्खियों बटोरते रहा है। मगर इस बार स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा अस्पताल परिसर को अखाड़ा बनाये जाने के बाद सिविल सर्जन का पल्ला झाड़ना बेहद गंभीर विषय है। जब स्वास्थ्यकर्मी और डॉक्टर आपस में ही लड़ाई झगड़े करेंगे तो ऐसी स्थिति में मरीजों को कैसी सेवा मिलेगी यह बड़ा ही गंभीर सवाल है।

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