सरिया गुरुद्वारा साहिब से निकली शोभायात्रा, सैकड़ों श्रद्धालु हुए शामिल

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सरिया(गिरिडीह)। गुरुनानक जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर सरिया गुरुद्वारा साहब में सिख समुदाय द्वारा गुरुवार को शोभायात्रा निकाली गयी। जिसमें सैकड़ों की संख्या में सिख समाज के लोगों ने हिस्सा लिया। शोभायात्रा का जत्था सरिया गुरुद्वारा से निकलकर सरिया बाजार, स्टेशन रोड, थाना रोड सहित पूरे बाजार का भ्रमण किया।

गौरतलब है कि यह पर्व सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरुनानक देव के जन्मदिन पर मनाया जाता हैं। इनके अनुयायी इन्हें गुरु नानक, गुरु नानक देव जी, बाबा नानक और नानकशाह नामों से संबोधित करते हैं। लद्दाख व तिब्बत में इन्हें नानक लामा भी कहा जाता है। गुरु नानक अपने व्यक्तित्व में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्मसुधारक, समाजसुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबंधु सभी के गुण समेटे हुए थे।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था नानक जी का जन्म

इनका जन्म रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी नामक गांव में कार्तिकी पूर्णिमा के दिन एक खत्रीकुल में हुआ था। कुछ विद्वान इनकी जन्मतिथि 15 अप्रैल, 1469 मानते हैं। लेकिन प्रचलित तिथि कार्तिक पूर्णिमा ही है, जो अक्टूबर-नवंबर में दिवाली के 15 दिन बाद पड़ती है, उसी दिन मनाते है। इनके पिता का नाम कल्याणचंद मेहता कालू जी था, माता का नाम तृप्ता देवी था। तलवंडी का नाम आगे चलकर नानक के नाम पर ननकाना पड़ गया। इनकी बहन का नाम नानकी था। बचपन से इनमें प्रखर बुद्धि के लक्षण दिखाई देने लगे थे। लड़कपन से ही ये संसारिक विषयों से उदासीन रहा करते थे। पढ़ने लिखने में इनका मन नहीं लगा। 7-8 साल की उम्र में स्कूल छूट गया। क्योंकि भगवत्प्रापति के संबंध में इनके प्रश्नों के आगे अध्यापक ने हार मान ली और वे इन्हें ससम्मान घर छोड़ने आ गए। तत्पश्चात सारा समय वे आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में व्यतीत करने लगे।

कई वर्षों से निकाली जा रही हैं शोभायात्रा

कई वर्षो से यह पर्व सरिया गुरुद्वारा में सिख समुदाय द्वारा मनाया जाता रहा है, यहां शोभायात्रा एक दिन पूर्व सरिया गुरुद्वारा से निकाली जाती है। जबकि दुसरे दिन यानी कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरुदारा परिसर में लंगर का भी आयोजन होता है। जिसमे सिखों के अलावे विभिन्न समुदाय के लोग भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते है। रात्री को कवि दरबार भी लगाया जाता है। जिसमें गुरुनानक जन्मोत्सव को प्रत्येक वर्ष की भांति धूमधाम से मनाया जाता है।

दरबार के समय बच्चे व बड़े सबद, संगीत का गाण से रात्रि का महौल पावन हो उठता है। शोभायात्रा में मुख्य रूप से सरिया गुरुद्वारा साहिब कमिटी के प्रधान सरदार मनोहर सिंह बग्गा, उपाध्यक्ष गुरप्रीत सिंह बग्गा, सचिव सिमरन सिंह, कोषाध्यक्ष राजेंद्र  मखिजा, विकास सोनी, विशाल गंभीर, सेंकी सोनी, राहुल गंभीर, सम्मी सिंह, सेंकी सिंह, ऋषि सोनी, लक्की सोनी, अमित जुनेजा, सौरभ, राजवीर व महिलाओं में सुखविंदर कौर गंभीर, शमित सलुजा, कंचन सोनी आदि सैकड़ों लोग शामिल थे।

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