हार के झटके से अब तक नहीं उबर पाई विस में तीन सीटें गंवाने वाली भाजपा
गिरिडीह झारखंड टॉप-न्यूज़

हार के झटके से अब तक नहीं उबर पाई विस में तीन सीटें गंवाने वाली भाजपा

नेत्तृव मजबूत करने के लिए गिरिडीह अध्यक्ष के रुप में तलाशा जा रहा दमदार चेहरा
झाविमो का भाजपा में विलय के बाद हो सकती है अध्यक्ष समेत कमेटी में फेरबदल

मनोज कुमार पिंटू
गिरिडीह। विस चुनाव में तीन सीट गंवाने वाली भाजपा का भविष्य अब गिरिडीह में क्या होगा, यह बता पाना तो फिलहाल संभव नहीं है। लेकिन यह स्पष्ट दिख रहा है कि एक साथ तीन सीटों को गंवाने वाली भाजपा दो महीनें में खुद को हार के सदमे से बाहर नहीं निकाल पाई है। इसकी बानगी बीतें दिनों हुई पार्टी के बूथ स्तरीय बैठक में भी देखने को मिली। हार से झल्लाये कार्यकर्ता जहां एक ओर चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधियों पर पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को तव्वजों नहीं देना बता रहे थे। वहीं चुनाव संपन्न होते ही पार्टी एक बार फिर से बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने में जूट जाना है।

एक दमदार चेहरे की जरूरत

जिले में मिली बड़ी हार के बाद अब भाजपा को मजबूत होने के लिए गिरिडीह अध्यक्ष के रुप में एक दमदार चेहरे की जरुरत पड़ेगी। जो चुनाव के बाद से खराब हालत में चल रहे भाजपा के लिए संजीवनी बूटी का काम कर सकें। माना भी यही जा रहा है कि जिले में तीन सीट गंवाने की सबसे बड़ी वजह ग्रांउड लेबल पर कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं की उपेक्षा ही रही, जो भाजपा के वोटरों को लुभाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाया। अब ऐसे में पार्टी का प्रदेश नेत्तृव की बड़ी जिम्मेवारी होगी कि वह गिरिडीह की कमान किसी दमदार चेहरे को सौपें।

बाबूलाल मरांडी के लिए होगी बड़ी जवाबदेही

वैसे यह तो तय है कि अब झाविमो के भाजपा में विलय होने के बाद ही गिरिडीह के अध्यक्ष समेत जिला कमेटी में फेरबदल किया जाएगा। क्योंकि झाविमो का भाजपा में विलय होने के बाद झारखंड में भाजपा के पास एक बार फिर एक बड़े आदिवासी नेता के रुप में बाबूलाल मंराडी की घर वापसी के रुप में ही होगा। विलय के बाद बाबूलाल मंराडी को भाजपा के प्रदेश नेत्तृव की भी कमान मिलना भी तय माना जा रहा है। लिहाजा, अपने ही गृहजिले में एक दमदार जिलाधयक्ष को चुनना झाविमो सुप्रीमो के लिए सबसे बड़ी जिम्मेवारी होगी।

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वर्तमान अध्यक्ष के कार्यकाल में लोकसभा में प्रचम तो विस में तीन सीट पर हुई हार

गौरतलब है कि तीन साल के अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान निगम चुनाव में निवर्तमान अध्यक्ष प्रकाश सेठ के उपमहापौर बनने के बाद साल 2018 में प्रकाश सेठ को पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद पार्टी के प्रदेश नेत्तृव ने भाजपा नेता सुनील अग्रवाल को गिरिडीह का अध्यक्ष मनोनित किया गया। जिनके कार्यकाल में पार्टी ने कोडरमा और गिरिडीह लोस का चुनाव जीता, तो विस चुनाव में बड़े पैमाने पर भाजपा के पांरपरिंक वोट बैंक का बिखराव हुआ। जिसमें एक साथ तीन सींटे भाजपा को गंवानी पड़ी।

कई कर सकते है दावेदारी

बहरहाल भाजपा का गिरिडीह में भविष्य कितना प्रभाव वाला होगा, यह तो भविष्य के गर्भ में है। लेकिन जिलाध्यक्ष पद का चुनाव हुआ, तो चुनाव में अगड़ी और पिछड़ी जाती के कई नेता अपनी दावेदारी कर सकते है। जिसमें प्रमुख चेहरे में पिछड़ी जाति से वर्तमान जिला मंत्री सह युवा भाजपा नेता के रुप में उभर रहे देवराज के अलावे पूर्व में भी दावेदारी कर चुके महादेव दुबे, पुर्व जिलाध्यक्ष यदुनंदन पाठक, संदीप डंगाईच, पूर्व अध्यक्ष विनय शर्मा जैसे कई चेहरे है।

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