जान-जोखिम में डाल कर शहर के लोगों की प्यास बुझाते है पेयजलापूर्ति में कार्यरत कर्मी
गिरिडीह झारखंड

जान-जोखिम में डाल कर शहर के लोगों की प्यास बुझाते है पेयजलापूर्ति में कार्यरत कर्मी

मजदूरों के जोखिम पर संवेदक ने बंद कर रखी है आंखे

दो दिन पहले ही पैनल ब्लास्ट होने के कारण एक कर्मी हुआ था जख्मी

गिरिडीह। गिरिडीह नगर निगम इलाके में पेयजलापूर्ति के कार्य में लगे कर्मी किस प्रकार जोखिम के बीच पूरे निगम इलाके में पेयजलापूर्ति करते है। मंगलवार को इसकी पड़ताल सीधी नजर संवाददाता नेे भी की। पड़ताल के दौरान सबसे पहले तो ये पता चला कि कर्मियों को लेकर दुखद पहलू यह है कि संवेदक राजकुमार अग्रवाल बूना द्वारा कर्मियों को न्यूनतम मजदूरी का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। वहीं दुसरी और कर्मियों को सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। कार्यरत कर्मियों को संवेदक के द्वारा कोई उपकरण नहीं दिए गए। ऐसे में कर्मी बेहद जोखिम के साथ शहर में पेयजलापूर्ति कर रहे है।

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प्लांट में 440 वोल्ट के लाईन का होता है प्रयोग

जान-जोखिम में डाल कर शहर के लोगों की प्यास बुझाते है पेयजलापूर्ति में कार्यरत कर्मी

पड़ताल के क्रम में पाया कि नगर निगम के सभी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में कर्मी मंगलवार को भी रोज की तरह ड्यूटी कर रहे थे। लेकिन बगैर सुरक्षा उपकरण के। जबकि हर प्लांट में पानी के स्टोरेज के स्थान पर 440 वोल्ट का लाईन दौड़ रहा है। लेकिन किसी कर्मी के हाथ में ना तो दास्ताना दिखा और न ही पांव में जूते ही नजर आएं। यहां तक कि किसी कर्मी के सिर पर हेलमेट तक नजर नहीं आया। बावजूद कर्मी जोखिम के साथ शहर के महादेव तालाब रोड प्लांट, चैताडीह प्लांट, मवेशी अस्पताल प्लांट में पानी का स्टोरेज कर रहे थे। जिन स्थानों पर पानी का स्टोरेज किया जा रहा था, वहां कई हाईवोल्टेज वाले मोटर भी लगे हुए थे। जिसे पानी को स्टोरेज करने के लिए लगातार चालू ही रखा गया था।

संवेदक के द्वारा कभी नहीं दिया गया कोई सुरक्षा उपकरण

इधर सुरक्षा से जुड़े सवाल जब इन कर्मियों से पूछा गया, तो प्लांट में कार्यरत कर्मी गोपाल राम और संजय राम का कहना था कि प्लांट में कार्य करते हुए उनका पांच से अधिक समय गुजर चुका है। लेकिन संवेदक की ओर से अब तक कोई सुरक्षा उपकरण नहीं दिया गया था। उपकरण मांगे जाने पर संवेदक हर बार टाल-मटोल ही करते है। वैसे गौर करने वाली बात यह भी है कि दो दिन पहले ही चैताडीह प्लांट में कार्यरत कर्मी मो. वसीम ड्यूटी के दौरान प्लांट के पैनल में ब्लास्ट होने से गंभीर रुप से जख्मी हो गया था। बावजूद संवेदक द्वारा मामले को गंभीरता से नहीं लिया जाना भी संवेदक के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। इधर संवेदक राजकुमार अग्रवाल बूना से जब संपर्क करने की कोशीश किया गया, तो उनका मोबाइल लगातार नाॅट रिचेबल बता रहा था।

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