महिलाओं को दी जा है रही बकरी पालन का प्रशिक्षण
जमुआ झारखंड

महिलाओं को दिया जा रहा बकरी पालन का प्रशिक्षण

बकरियों के नस्ल, बिमारी व उपचार के बाबत दी गई जानकारी

जमुआ(गिरिडीह)। बकरी पालन से महिलाओं का आर्थिक विकास संभव है। उक्त बातें जमुआ के प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डाॅ नवीन कुमार आर्य ने शुक्रवार को दुम्मा में राष्ट्रीयकरण कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और आइडिया के संयुक्त तत्वावधान में आजीविका उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत आयोजित बकरी पालन में प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि बकरी पालन मुख्य रूप से दूध, माँस और चमड़ा के लिए किया जाता है। गिरिडीह जिला में ब्लैक बंगाल नस्ल की मादा और बीटल नस्ल का नर बकरी पालन व्यवसाय के लिए सबसे उपयुक्त होता है।

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बकरी घर ऊँचा और सुखा हो

इस दौरान बकरियों को होने वाली बिमारियों की जानकारी देते हुए डाॅ. नवीन ने कहा कि पीपीआर, ईटी, गोट पाॅक्स, फूट राॅट, गला घोंटू, लंगड़ा, खुरहा, चपका, एन्थ्रेक्स सहित कई प्रकार की बिमारियां बकरियों को होती है। उन्होंने इन बिमारियों से निजात के उपाय बताते हुए कहा कि साल में दो बार बकरियों को पीपीआर और ईटी का टीका लगाना चाहिए। पशु चिकित्सा पदाधिकारी धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बकरी घर ऊँचा और सुखा जगह में होना चाहिए, ऐसा होने पर बकरियों को जीवाणु और विषाणु से बचाया जा सकता है। मौके पर संस्था के मुकेश कुमार, सुरेन्द्र शर्मा, सुभाष कुमार सहित कई लोग मौजूद थे ।

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