मंगलमय नववर्ष का बिहान हो !
गिरिडीह झारखंड साहित्य

मंगलमय नववर्ष का बिहान हो !

नववर्ष

मंगलमय नववर्ष का बिहान हो !   “सुधाकर”

1

” क्रूरता के वक्ष पर करुणा का भान हो,

बन्दुक की नली में बांसुरी की तान हो,

जाति धर्म भाषा से ऊंचा राष्ट्र महान हो !

2

युद्ध का सिंधु खारा, क्षीरसागर हो शांति का,

सत्य के श्रीविष्णु संग, अहिंसा उजागर श्रीलक्ष्मी का,

विज्ञान धर्म की नींव पर,नव राष्ट्र का निर्माण हो !

3

विश्व मैत्री हों उपनिषद,वेद समता का गान हो,

सहृदयता के ज्ञय में श्रमश्वेद जल का दान हो,

मनुजता हित हमारी कलुषिता बलिदान हो !

4

तिमिर अज्ञानता का मिटे, आलोकित हो ज्योति सद्ज्ञान का,

सुख शांति के सुमन खिलें,क्षय हो घृणा विषाद का,

बढ़ें सभी प्रगति के पथ पर, मंगलमय नववर्ष का बिहान हो !!!

(कवि परिचय : इस आलेख के कवि श्री महेंद्रनाथ गोस्वामीसुधाकरकिसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। ये हिंदी और खोरठा के जाने माने साहित्यकार होने के साथ साथ रंगमंच के भी उम्दा कलाकार हैं। झारखण्ड सरकार के कथा संगम, खोरठा रत्न, श्रीनिवास पानुरी खोरठा प्रबुद्ध सम्मान सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित महेन्द्रनाथ की कई रचनाएँ देश के प्राय: सभी प्रमुख अखबारों, पत्रपत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। इनके द्वारा खोरठा में लिखी कई किताबें झारखण्ड के विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल हैं।)

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