क्या झामुमो 14 साल बाद पुनः हासिल कर पायेगी अपनी खोई प्रतिष्ठा ?
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क्या झामुमो 14 साल बाद पुनः हासिल कर पायेगी अपनी खोई प्रतिष्ठा ?

भाजपा पर है अपनी सीट को बचाने का दबाव

रिपोर्ट : मनोज कुमार पिंटू / श्रीहरि सुदर्शन

गिरिडीह : झारखण्ड विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण में संथाल परगना में होनेवाले मतदान के समाप्त होने के साथ ही अब राजनीति के रणनीतिकार आँकड़ों के विश्लेषण में जुट गये हैं। विभिन्न श्रोतों से प्राप्त आँकड़ों पर अगर गौर किया जाय तो प्रदेश में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। जिससे सभी प्रमुख दलों के नेताओं के चेहरों पर पसीना साफ झलक रहा है। हर दल के कार्यालयों में सुबह से लेकर शाम ढलने तक प्रत्याशी और कार्यकर्त्ता जोड़- तोड़ करते दिख रहे हैं। तीसरे और चौथे चरण में संपन्न हुए गिरिडीह जिले के छह विधानसभा सीटों पर खड़े प्रमुख उम्मीदवार भी बेचैनी में दिन गुजार रहे हैं। वहीं कई सट्टेबाज जीत के संभावित प्रत्याशी और दल पर सट्टा लगाने को भी तैयार हैं।

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2004 के विधानसभा चुनाव को दुहराने के हैं आसार

राजनीतिक विश्लेषकों और अबतक के प्राप्त आँकड़ों पर अगर गौर करें तो गिरिडीह विधानसभा सीट से जहां वर्तमान विधायक सह भाजपा प्रत्याशी निर्भय कुमार शाहाबादी अपनी तीसरी लगातार जीत को बरकरार रखने के लिए जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं, वहीं झामुमो भी अपने 14 साल पुराने सीट को पुनः हासिल करने के लिए लड़ाई लड़ता दिख रहा है। वर्ष 2004 में झामुमो के टिकट पर मुन्नालाल ने भाजपा के कद्दावर नेता सह पूर्व मंत्री चन्द्रमोहन प्रसाद को शिकस्त दी थी। इस बार फिर झामुमो के सुदिव्य कुमार सोनू भाजपा के वर्तमान विधायक निर्भय कुमार शाहाबादी को पटखनी देने के मूड में दिख रहे हैं। क्योंकि भाजपा के वर्चस्व वाले शहरी इलाकों से भाजपा इस बार वोटरों को अपने घरों से बाहर निकालने में नाकाम रही है। जिसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ सकता है। जबकि जीत में निर्णायक भूमिका निभानेवाले अल्पसंख्यक और पीरटांड के वोटरों ने इस चुनाव में खुलकर मतदान किया है।

भाजपा और झामुमो को है सेंधमारी का डर

झाविमो के गठबंधन से बाहर होने और खुले तौर पर मैदान में होने से न तो भाजपा और न ही झामुमो पूर्ण रूप से अपनी जीत के प्रति आश्वस्त है। वहीं विधानसभा क्षेत्र में लोजपा और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार के होने से भी दोनों प्रमुख प्रत्याशियों के वोटबैंक में थोड़ी बहुत सेंधमारी की संभावना है। हालाँकि प्रत्याशियों की जीत-हार अल्पसंख्यकों और पीरटांड के वोटरों का रुझान ही तय करेगा। फिलहाल सभी प्रत्याशियों और समर्थकों को 23 दिसम्बर का बेसब्री से इन्तजार है।

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