बच्चों एवं महिलाओं का कराया गया टीकाकरण
गांवां झारखंड

बच्चों एवं महिलाओं का कराया गया टीकाकरण

कैलाश सत्यार्शी के कार्यकर्ताओं ने निभाई अहम भूमिका

गांवा(गिरिडीह)। गांवा प्रखंड के मालडा पंचायत में संचालित बाल मित्र ग्राम पांडेयडीह मुसहरी में कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउन्डेशन की ओर से कार्यकर्ता संदीप नयन ने मासिक टीकाकरण का कार्य कराया। इस दौरान 13 नवजात बच्चों और 3 गर्भवती महिलाओं को उनके उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य के लिए उन्हे टीका से लाभान्वित किया गया। संस्था के कार्यकर्ता सन्दीप नयन ने कहा कि इस गाँव में सितम्बर 2019 से पहले महीनों से टीकाकरण कार्य नहीं हो रहा था, जिसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी गयी थी। लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उसके बाद 1 अगस्त 2019 को गिरीडीह में हुए एनसीपीसीआर की जनसुनवाइ में कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन के प्रयास से यह मुद्दा उठाया गया था, जिसके बाद सितम्बर 2019 में इस स्थान पर एएनएम सुनिता कुमारी को टीकाकरण का कार्य सौपा गया, तब से लगातार यहाँ के ग्रामीण इससे लाभान्वित हो रहे हैं।

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संस्थागत प्रसव को अपनाने के लिए किया प्रेरित

कहा कि यहां के निवासियों, ग्रामीण समुदायों को संस्थागत प्रसव के तरीकों को अपनाने के लिए भी सभी को प्रेरित किया जा रहा है। कुछ इसके फायदे को समझ रहे हैं और अपना भी रहे हैं। लेकिन समाज का एक बड़ा तबका इसके फायदे का सही तरीके से लाभ नहीं ले रहे हैं, पर जरुरत है कि हर कोई संस्थागत प्रसव के फायदे को समझें और अपनाये तभी सरकार द्वारा संचालित विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमो को सफल समझा जाएगा । साथ ही उन्होंने बताया कि कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन गाँवा के द्वारा 20 ग्रामांे में विभिन्न स्तरों पर जागरुकता कार्यक्रम चलाने का काम किया जाता रहा है और अब जरुरत है की स्वास्थय विभाग द्वारा इस सन्दर्भ में अतिपिछडे इलाकों में नुक्क्ड नाटक के माध्यम से जागरुकता अभियान धरातल स्तर पर चलाने का काम करे ताकि हर एक स्वास्थ्य योजनाओं के बारे में जन जन तक जानकारी पहुंचे।

ग्रामीणों को कर रहे है जागरूक

टीकाकरण करने आई एएनएम सुनीता कुमारी ने बताया कि ग्राम में टीकाकरण कार्य में कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउन्डेशन का काफी सहयोग मिल रहा है, और जिस प्रकार से इनके कार्यकर्ता ग्रामीणों को जागरूक कर रहे है उससे यहां के ग्रामीण बढ़ चढ कर टीकाकरण में हिस्सा ले रहे हैं। यहाँ लोग परम्परागत प्रसव पर काफी जोर देते थे पर अब स्थिति बदलने लगी है और संस्थागत प्रसव के लाभों को समझने लगी है, पर अभी भी पुरे तरीके से यहाँ के ग्रामीण समुदायों में संस्थागत प्रसव को नहीं अपनाया जा रहा है पर इनकी सोच को बदलने में भी कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउण्डेशन बेहतर कार्य कर रही है।

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