धनवार विस: निर्दलीय प्रत्याशी के चुनावी मैदान में आने के बाद बदला चुनावी समीकरण
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धनवार विस: निर्दलीय प्रत्याशी के चुनावी मैदान में आने के बाद बदला चुनावी समीकरण

दिग्गज नेताओं के बीच मजबूती से जगह बना रहे है निर्दलीय प्रत्याशी अनूप

रिकेंश कुमार/मनोज कुमार पिंटू

गिरिडीह। तिसरे चरण के तहत धनवार विधानसभा में आगामी 12 दिसंबर को होने वाले चुनाव को लेकर चुनावी मैदान में खड़े सभी प्रत्याशी पूरा दम खम लगाये हुए है। वहीं चुनावी मैदान में दिग्गजों नेताओं के बीच युवा चेहरा समाजसेवी अनूप संथालिया के आने के बाद धनवार विस सीट काफी हाईप्रोफाइल बन चुका है। एक तरफ अकेले युवा समाजसेवी के रुप में धनवार के समाजसेवी अनूप संथालिया है तो दुसरी तरफ राजनीतिक दलों के सूरमा भी पिछले चुनाव की तरह किस्मत आजमा रहे है। अनूप संथालिया के कारण धनवार विस सीट पर हर लोगों की नजर है। लिहाजा, बनते-बिगड़ते समीकरण के बीच धनवार के निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में युवा समाजसेवी अनूप संथालिया अब खुद रेस में शामिल हो चुके है।

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जीत के लिए सभी प्रत्याशियों को करनी पड़ रही है रात दिन मेहनत

धनवार विधानसभा में जहां एक ओर वर्तमान विधायक राजकुमार यादव के साथ ही सूबे के प्रथम मुख्यमंत्री सह झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी, भाजपा के लक्ष्मण सिंह के अलावे झाविमो से ही धनवार विधानसभा सीट से विधायक रहे झामुमो प्रत्याशी निजामउद्दीन अंसारी रेस में थे। लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में अनूप संथालिया के आने के बाद समीकरण का स्वरूप ही बदल गया है। धनवार के अलावे विस क्षेत्र के तिसरी-गांवा समेत कई इलाकों में अगर भाजपा, भाकपा माले और झाविमो प्रत्याशी के साथ झामुमो प्रत्याशी की चर्चा है तो इस चर्चा में अब निर्दलीय प्रत्याशी अनूप संथालिया भी मजबूती के साथ अपनी जगह बना चुके है। चुनावी मौसम में अचानक बदले समीकरण से विभिन्न दलों से चुनावी मैदान में खड़े सभी प्रत्याशी न सिर्फ हथप्रभ है बल्कि अपनी जगह बनाने के साथ रेस में आगे निकलने के लिये दिन रात मेहनत कर रहे है।

निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में देखा जा रहा पार्टी समर्थकों का झुकाव

ग्रांउड रिपोर्टिंग के दौरान सीधी नजर की टीम ने जब धनवार विधानसभा का जायजा लिया तो यह नजर भी आया कि भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह को रेस में बने रहने के लिए सबसे अधिक मशक्कत करनी पड़ सकती है। क्योंकि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह भाजपाईयों व भाजपा समर्थकों का समाजसेवी अनूप संथालिया के प्रति झुकाव माना जा रहा है। ऐसे में जो समीकरण बन रहा है। वह भाजपा प्रत्याशी के हित में कहीं से भी सही नहीं माना जा सकता है। हालांकि 23 दिसंबर को चुनावी परिणाम आने के सबकुछ स्पष्ट हो जायेगा।

2014 में तीसरे स्थान पर थे भाजपा प्रत्याशी

2014 के परिणाम पर नजर डालें, तो भाकपा माले प्रत्याशी राजकुमार यादव पांच हजार 63 मत हासिल कर विनर बने थे। जबकि 39 हजार 922 वोट हासिल कर झाविमो सुप्रीमो बाबू लाल मरांडी रनर बने थे। वहीं भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह 31 हजार 659 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। लिहाजा, पार्टी में भीतरघात होने के कारण इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी किस स्थान पर रहेगें, यह कहना भी मुश्किल है। भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में बह रही हवा या, उनके दावे किस हद तक सही साबित होगें। यह तो भविष्य के गर्त में है, लेकिन पूर्व सांसद रवीन्द्र राय समेत धनवार के भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह की परेशानी को लगातार बढ़ा रही है।

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