कांग्रेस पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. अजय के करीब रहने का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है सरफराज अहमद को

कांग्रेस पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. अजय के करीब रहने का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है सरफराज अहमद को

गठबंधन के तहत गिरिडीह और डुमरी के साथ गांडेय सीट भी जा सकती है झामुमो की झोली में

मनोज कुमार पिंटू/रिंकेश कुमारः

गिरिडीह : गिरिडीह के पूर्व सांसद सह गांडेय से साल 1980 में विधायक रह चुके कांग्रेस के दिग्गज चेहरों में डा. सरफराज अहमद को इस विस चुनाव में कांग्रेस उतना तरजीह नहीं दे रही है। इसके पीछे की वजह शायद यह है कि डा. सरफराज अहमद पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और अब आम आदमी पार्टी के नेता डा. अजय कुमार से करीबी माने जाते हैं।

इतना ही नहीं, अब तो महागठबंधन ने सीटों का फ़ॉर्मूला तय भी कर लिया है और प्रेस कांफ्रेंस कर इसकी घोषणा भी कर दी है। बहुत संभव है कि फोर्मुला के तहत गंदे सीट झामुमो के खाते में गई हो। ऐसे में सरफ़राज़ अहमद के सामने बड़ी विकट परिस्थिति आ जायेगी। पार्टी के सिपाही बन कर रहते हैं तो बलिदान देना होगा और चुनाव लड़ना है तो या तो बागी होना पडेगा या पाला बदलना पडेगा।

वैसे पार्टी सूत्रों की मानें तो डा. अजय कुमार का करीबी रहना भी पार्टी के दिग्गज चेहरे डा. अहमद के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। लोस चुनाव में यह दिखा भी था। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष रामेशवर उरांव से लेकर पार्टी के राज्य चुनाव प्रभारी आरपीएन सिंह नाराज दिखते रहे है। यह भी माना जाता है  कि डा. अजय कुमार अगर कांग्रेस में रहते तो गांडेय सीट से डा. अहमद का रास्ता साफ था।

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लेकिन अब जब पैरवीकार ही नहीं रह गए, तो फिर पैरवी किसकी?  लिहाजा, डा. अहमद को यह चिंता सता रही है कि 2019 में गांडेय से चुनाव लड़ने का सपना कहीं सपना बनकर नहीं रह जाए। यही वजह है कि सीट शेयरिंग से लेकर कांग्रेस के महागठबंधन में शामिल होने का निर्णय वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष रामेशवर उरांव के साथ पार्टी के राज्य प्रभारी आरपीएन सिंह की भूमिका ही अब तक नजर आ रही है।

यही नही दो माह पहले भी जब शहर के नगर भवन में पूर्व सांसद तिलकधारी सिंह का सम्मान समारोह आयोजित था, तो समारोह में खुद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आएं, लेकिन इस मंच पर भी डा. अहमद को संभवत वह स्थान नहीं मिल, जो मिलना चाहिए था। समारोह के दौरान यह नजर भी आया था।

गौरतलब है कि डा. अहमद एकीकृत बिहार में साल 1980 से लेकर 1984 तक कांग्रेस के टिकट पर विस का प्रतिनिधित्व तो साल 1984 में गिरिडीह लोस का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। लिहाजा, साल 2019 के चुनाव में इस बार संभवत डा. अहमद को यह मौका कांग्रेस संभवत उनको नहीं दे।

 

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