जमीन रजिस्ट्री को लेकर सरकार के निर्देश पर बिफरा बुद्धिजीवी वर्ग

जमीन रजिस्ट्री को लेकर सरकार के निर्देश पर बिफरा बुद्धिजीवी वर्ग

सरकार का निर्देश जनहित के विरूद्ध: चुन्नुकांत 

गिरिडीह। राज्य में गैर मजरुआ खास सहित कई प्रकार की जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगी हुई है। कई प्रकार की जमीन को प्रतिबंधित सूची में डाल दिया गया है। हालांकि सरकार ने थोड़ी रियायत देते हुए निर्देश दिया है कि उपायुक्त से अनुमति लेने के बाद ऐसी ज़मीनों की रजिस्ट्री की जा सकती है। पर इस घोषणा से लोग संतुष्ट नहीं हैं। गिरिडीह जिले में इसको लेकर खासी नाराजगी देखी जा रही है। चहुंओर सरकार के इस निर्णय की आलोचना की जा रही है। अधिवक्ता संघ समेत कई सामाजिक संगठनों ने सरकार के इस निर्णय का खुला विरोध किया है। अधिवक्ता संघ के सचिव सह झाविमो नेता चुन्नुकान्त की अगुवाई में बार एसोसिएशन भवन में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर विरोध जताया गया। प्रेस वार्ता में बोलते हुए चुन्नुकान्त ने कहा कि सरकार के निर्देश के आलोक में जमीन की जो प्रतिबंधित सूची तैयार की गयी है, उसमें वैसे लाखों रैयतों की गैरमजरूआ खास भूमि भी डाल दी गयी है, जिसकी जमाबंदी वर्षों से कायम है और रैयत के दखल कब्जे में है। प्रतिबंधित सूची में डाली गयी जमीन की रजिस्ट्री, म्युटेशन व एलपीसी निर्गत करने आदि पर भी रोक लगा दी गयी है। जो जनता के हित में नहीं है।

सीधी नजर देखें सिटी केबल के 277 नम्बर और हमारे youtube चैनल पर

सरकार के निर्देश को दी चुनौती

उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित सूची में शामिल प्लॉटों की जमीन न ही खरीदी जा सकती है और न ही बेची जा सकती है। गिरिडीह जिले में लगभग 70 हजार से भी ज्यादा जमीन के प्लॉटों को प्रतिबंधित सूची में डाला गया है, जिससे सात लाख से भी अधिक रैयत प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सूबे की रघुवर सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय जनहित में नहीं है। इसलिए सरकार के इस फैसले के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन किया जायेगा। प्रेस वार्ता के दौरान अधिवक्ता टीपी बक्सी, सतीश कुंदन, एकलव्य उजाला, निवेश कुमार सिन्हा, प्राण वल्लभ, दिनेश स्वर्णकार समेत कई लोग मौजूद थे।

ख़बरों से अपडेट रहने के लिए जुड़े हमारे व्हाट्सएप ग्रुप एवं फेसबुक पेज से….