11 करोड़ 64 लाख के घोटाले ने गिरिडीह के प्रधान डाकघर को हिलाया

11 करोड़ 64 लाख के घोटाले ने गिरिडीह के प्रधान डाकघर को हिलाया

डाकघर के तीन बाबूओं ने फर्जी खाता और खाताधारक तैयार कर घोटाले को दिया अंजाम

तीनों बाबू संस्पैड, तो तीनों के खिलाफ सरकारी राशि गबन करने का केस दर्ज

गिरिडीह। 11 करोड़ 64 लाख के घोटाले ने गिरिडीह के गांधी चैक स्थित प्रधान डाकघर का नींव हिलाकर रख दिया। वैसे डाकघर के इतने बड़े घोटाले की पृष्ठभूमि भी डाक विभाग के उन तमाम बाबूओं ने तीन साल में तैयार की है। जिनके खिलाफ प्रांरभिक कार्रवाई में तीन घोटालेबाज बाबूओं को संस्पैड करने के साथ ही नगर थाना में तीनों के खिलाफ सरकारी राशि गबन करने का केस दर्ज कराया गया है। इधर विभागीय स्तर पर घोटाले की जांच भी शुरु कर दी गई है।

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20 दिन पहले ऑडिट में हुआ घोटाले का खुलासा

बताया जाता है कि इतने बड़े घोटाले के तीनों बाबूओं ने फर्जी खातों को तैयार कर सरकारी राशि को चूना लगाया। हालांकि कितने फर्जी खातें तैयार किए गये है। इसकी जांच की जा रही है। फिलहाल घोटाले को लेकर डाक विभाग ने नगर थाना में जिस प्रकार का आवेदन देकर केस दर्ज कराया है, उससे पता चलता है कि करोड़ों का यह घोटाला एक-दो दिन में नहीं बल्कि तीन साल में हुई है। जिसका खुलासा 20 दिन पहले डाक विभाग के आॅडिट के दौरान किया गया। मामला जब सामने आया तो डाक विभाग के पांव के नीचे से जमीन खिसक गई।

झारखंड डाक परिमंडल के निदेशक के निर्देश पर प्रधान डाकघर के डाकपाल सोमनाथ मित्रा ने नगर थाना को आवेदन देकर प्रधान डाकघर के बचत बैंक कांउटर के सहायक डाकपाल शशिभूषण कुमार, पोस्ट मास्टर मो. अल्ताफ और वासुदेव दास पर सरकारी राशि गबन करने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है। इधर नगर थाना पुलिस ने आवेदन के आधार पर थाना कांड संख्या 240/19 दर्ज कर 11 करोड़ 64 लाख के घोटाले की जांच शुरु कर दी है।

तीन सालों तक होता रहा घोटाला

थाना को दिए आवेदन में डाकपाल सोमनाथ मित्रा ने तीनों पर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रधान डाकघर के अन्र्तंगत विभिन्न उपडाक घरों में हासिल डिमांड ड्राफ्ट को प्राप्त कर तीनों घोटालेबाज बाबूओं ने फर्जी खाता तैयार कर डिमांड ड्राफ्ट के राशियों को फर्जी खाते में ट्रांसर्फर कर चूना लगाया। तीनों बाबूओं ने प्रधान डाकघर की इतनी बड़ी राशियों को तीन साल में गबन किया है। जिसका जिक्र भी थाना को दिए आवदेन में है। जिसमें 03 अक्टूबर 2016 से लेकर 30 अगस्त 2019 शामिल है।

तीन साल तक नहीं दिया डिमांड ड्राफ्ट का ब्यौरा

दरअसल, घोटाले में शामिल तीनों घोटालेबाजों में मो. अल्ताफ, शशिभूषण प्रसाद और वासुदेव दास ने डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से निकासी की गई राशियों का ब्यौरा तीन सालों के भीतर कभी भी प्रधान डाकघर के कोषागार डेली खाता में दिया ही नहीं। अर्थात, विभिन्न उप डाकघरों के नाम डिमांड ड्राफ्ट से निकासी की गई राशियों का ब्यौरा कभी प्रधान डाक घर के कोषागार में जमा नहीं हुआ, जबकि हर राशियों के निकासी का फाईनल रिपोर्ट नियमतः निकासी के दिन शाम को देना पड़ता है। जिसे इन घोटालेबाजों ने जमा नहीं किया। लिहाजा, प्रधान डाक घर यही मानकर चल रहा है कि घोटाले की पृष्ठभूमि भी यही से तैयार हुई।

लोगों द्वारा किए गए निवेश व वन विभाग के मनरेगा योजना की है राशि

डाक विभाग सूत्रों की मानें तो डाकघर में हुए इतने बड़े घोटाले की राशि में अधिकांश राशि लोगों द्वारा विभिन्न योजनाओं में किए पैसे निवेश के बाद वन विभाग के मनरेगा योजना के मजदूरों के भुगतान की राशि शामिल होने की बात सामने आई है। फिलहाल दागदार कर्मियों के कारण डाक विभाग के कोई भी पदाधिकारी अब कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे है। इधर डाकपाल मित्रा ने थाना को दिए आवेदन में दर्जन भर से अधिक उन फर्जी खाता का भी जिक्र किया है। जिसमें विभिन्न उप डाकघर के डिमांड ड्राफ्ट की राशियों को फर्जी खातों में ट्रांसर्फर किया गया।

इन खातों से हुई रूपयों की निकासी

थाना को दिए फर्जी खातों के नंबरों और खाताधारक में 3390421714-ताजूद्दीन अंसारी को एक करोड़ एक लाख 64 हजार, 3390432413-मो. समीर अंसारी-एक करोड़ एक लाख 86 हजार, 3924185501-रुख्साना बेगम चार लाख पांच सौ 65, 3966386203-रामप्रवेश सिंह 78 हजार 931, 3390446151-लोथा हेम्ब्रम 10 लाख पांच सौ 42, 3766354349-गोपाल यादव सात लाख छह सौ, 2103390433007- मागदा हांसदा 91 लाख 18 हजार, 3766377713-मो. मकसूद आलम 93 लाख 910, 3765249462-मो. आरिफ 91 लाख 69 हजार 732, 3766323116-कमलाकांत पासवान 77 लाख 65 हजार, 3766365574-रोहित राॅय 72 लाख 61 हजार, 3390436244-मो. नौशाद आलम एक करोड़ 93 लाख 53 हजार, 8189188597- सच्चिदानंद सिंह चार लाख 20 हजार है। फिलहाल इन सारे खातों और नामों की भी जांच हो रही है कि यह कितने सही है।

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