आदेश था सरकारी जमीन पर कब्जाधारियों को चिन्हित करने का
गिरिडीह झारखंड टॉप-न्यूज़

आदेश था सरकारी जमीन पर कब्जाधारियों को चिन्हित करने का

अनुशंसा हो गयी सभी जमाबंदी रद्द करने की

पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने गिरिडीह डीसी को लिखा था पत्र

तत्कालीन अपर समाहर्ता ने गैरमजरुआ खास की जमाबंदी रद्द करने की अनुशंसा की

मनोज कुमार पिंटूः

गिरिडीह : गिरिडीह के तत्कालीन अपर समाहर्ता अशोक साह के जमाबंदी रद्द करने से संबधित एक रिपोर्ट से पूरे गिरिडीह में हड़कंप मचा हुआ है। सीधी नजर जनहित के इस मुद्दे को लगातार उठा रहा है। इस रिपोर्ट तैयार करने के दौरान कुछ महत्पूर्ण दस्तावेज भी सीधी नजर को हाथ लगे है। इन दस्तावेजों को देखने के बाद साफ पता चलता है कि किस प्रकार रघुवर सरकार के कुछ पदाधिकारी निरंकुश हो कर मनमानी करने को उतारू हैं। दरअसल, राज्य की पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने प्रदेश के  हरेक जिले के डीसी को पत्र लिखकर सरकारी जमीनों पर कब्जा करने के बाद अवैध जमाबंदी करा कर रह रहे कब्जाधारियों को चिन्हित कर जमाबंदी रद्द करने का निर्देश दिया था।

जबकि तत्कालीन अपर समाहर्ता ने ठीक इसके उलट सालों से रह रहे गैमजरुआ खास  रैयतदारों की जमाबंदी को ही संदिग्ध मानते हुए जमाबंदी रद्द करने की अनुशंसा कर दी। सदर अचंल के अधीन जितने भी मौजा हैं, उन तमाम मौजों के कई रैयतदारों की जमाबंदी को रद्द करने की अनुशंसा कर दी गई है। बहरहाल, तत्कालीन अपर समाहर्ता ने यह कारनामा आठ माह पहले किया था। जिसके बाद तमाम गैरमजरुआ खास के मौजों की जमीनों पर प्रतिबंध ही लगा दिया गया। लिहाजा, प्रतिबंध लगने के बाद रजिस्ट्रार ने जमीनों की खरीद-ब्रिकी पर भी रोक लगा दी। साथ ही गैरमजरुआ के रैयतदारों के तमाम प्लाॅट पर म्यूटेशन पर भी रोक लग गई है। इसके लिए अपर समाहर्ता ने जिस प्रकार का रिपोर्ट और पत्र राज्य सरकार को भेजा है। वह चैंकाने वाला है। जिसमें जिलें और शहर के तमाम मौजों की जमीनों का जिक्र है।

इधर प्रतिबंध को लेकर झामुमो नेता इरशाद अहमद वारिस ने साफ तौर पर कहा कि पूरा शहर ही गैरमजरुआ खास पर बसा हुआ है। शहर के जिन जमीनों पर आज बड़े और छोटे मकान बने हुए है। वह तमाम प्लाॅट एक तरह से गैरमजरुआ खास है जिसे सालों पहले जमीदारों ने हुकुमनामा और अन्य तरीके से रैयतदारों को जमाबंदी और रजिस्ट्री किया था। फिर कोई जमाबंदी को रद्द करने की अनुशंसा कैसे कर सकता है?

हालांकि गिरिडीह के अवर निबंधक रामेश्वर सिंह का कहना है कि सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए ही रजिस्ट्री की जा रहा है। किसी प्रकार की कोई रोक नहीं लगी है।

बहरहाल, यह तो तत्कालीन अपर समाहर्ता समेत अन्य पदाधिकारियों द्वारा किए गए गड़बड़ी का परिणाम है कि मकान व जमीन मालिकों को उनके पूर्वजों की जमीन से बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है।

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