1951 से मनाया जा रहा है बरमसिया स्थित रक्षित दुर्गा मंडप में दुर्गोत्सव
गिरिडीह झारखंड धर्म

1951 से मनाया जा रहा है बरमसिया स्थित रक्षित दुर्गा मंडप में दुर्गोत्सव

रक्षित परिवार अपने निजी खर्चे से करते है पूजा का आयोजन

गिरिडीह। शहर के बरमसिया स्थित रक्षित दुर्गा मंडप रक्षित परिवार के द्वारा 1951 से निजी खर्चे से मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की जा रही है। इस मौके पर कोलकाता सहित दूसरे राज्यों में भी रहने वाले परिवार के सभी सदस्य दुर्गोत्सव में शामिल होने के लिए गिरिडीह पहुंच जाते है।

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शारदीय नवरात्र में परिवार के सभी लोग आ जाते है गिरिडीह

रक्षित दुर्गा मंडप जहां 1951 से लगातार रक्षित परिवार के द्वारा शारदीय नवरात्र में भव्य रूप से दुर्गोत्सव मनाया जा रहा है। गिरिडीह के अलावे कोलकाता सहित दुसरे राज्यों मे ंरहने वाले परिवार के अन्य सदस्य शारदीय नवरात्र में गिरिडीह आ जाते है और पूरी आस्था के साथ मां दुर्गा की आराधना में जूट जाते है। पूजा के खर्च परिवार के सभी सदस्य मिलकर उठाते है। हालांकि नवरात्र के दौरान पूजा की भव्यता ऐसी होती है कि दूर दूर से लोग माता का दर्शन करने के लिए यहां पर आते है।

16 सौ प्रकार से होती है मां पूजा अर्चना

पूजा के आयोजन में अहम योगदान देने वाले खोखन रक्षित ने बताया कि माता की कृपा से 1951 में उक्त स्थान पर उनके पिता व परिवार के अन्य सदस्यों के द्वारा पूजा की शुरूआत की गई थी। बताया कि हमारे यहां खास बात यह है कि हम लोग विजयदशमी के दिन सुबह में ही कलश मंगल यात्रा निकाली जाती है। वहीं नवरात्र के दौरान 16 सौ प्रकार से मां की पूजा की जाती है।

कुछ वर्षों से स्वयं बनाते है मां की प्रतिमा

उन्होंने बताया कि यहां पर बंगाल से आये पुरोहित के द्वारा पूजा अर्चना की जाती है। बताया कि हाल के कुछ वर्षो से वे स्वयं मां की प्रतिमा खुद से बना रहे है।

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