" राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर उनको समर्पित महेन्द्रनाथ गोस्वामी "सुधाकर" की कविता "
गिरिडीह झारखंड साहित्य

” राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर उनको समर्पित महेन्द्रनाथ गोस्वामी “सुधाकर” की कविता “

” विडम्बना “

लेखक परिचय : इस आलेख के लेखक श्री महेंद्रनाथ गोस्वामी “सुधाकर” किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। ये हिंदी और खोरठा के जाने माने साहित्यकार होने के साथ साथ रंगमंच के भी उम्दा कलाकार हैं। झारखण्ड सरकार के कथा संगम, खोरठा रत्न, श्रीनिवास पानुरी खोरठा प्रबुद्ध सम्मान सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित महेन्द्रनाथ की कई रचनाएँ देश के प्राय: सभी प्रमुख अखबारों, पत्र – पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। इनके द्वारा खोरठा में लिखी कई किताबें झारखण्ड के विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल हैं।सुधाकर

(1)

जिस दिन

मतिभ्रष्ट समुदाय में

एकवस्त्रा दूरग्नि का

आवरण खींचकर हटाया गया था

तब

कोई बज्र नहीं गिरा

न बिजली कड़की

न आसमान ही रोया

और न ही धरती की छाती फटी थी

और तब

नग्न अग्निशिखा

अनावृता होकर

प्रचण्डावेग से धधक उठी थी

जिसकी आँच में

नीति, अनुशासन, बुद्धि, विवेक,

न्याय, वीरता, रिश्ते-नाते

सब पिघलकर बह गए !

(2)

तेरह वर्ष तक के

खुले लम्बे, काले केश

काली सर्पिणी सी

अपने प्रतिशोध की

लपलपाती जिह्वा से

मनुपुत्र के लाल-लाल

लहू चाटकर

और भी काली, रेशमी, चमकीली हो उठी थी

और

नरमेघ की लीला से बहा

शोणित का समुद्र सोखकर

हरी भरी ममतामयी वसुधा का

द्विधित हृदय गरलमय हो उठा था

और

जीत के तीव्र हर्ष-निनाद से

अर्धमृतों की आर्तनाद से

अर्धांगिणीयों के करुण क्रन्दन से

असहाय, अनाथ शिशुओं के

मुख से निकलती उसाँसों से

हवा में व्यंग्य के संगीत बज रहे थे

और

चिताओं से विकारों की

विकराल अग्निशिखाओं की

धधकती लपटों से

क्षुद्र व्योम का हृदय भी दग्ध हो उठा था

पर

धर्माधर्म का भेद न खुला

और न ही पुण्य-पाप का बँटवारा हुआ !

(3)

बन्द आँखों का

दृष्टिकवच भी

नग्न पुत्र को

केशकर्षिता के

अपमान से

न बचा सका

इच्छाधारी मृत्यु ने भी

प्रतिशोध की

ज्वालमाला का

वरण किया

जन्मांग कवचों का

अभेद्य ढाल भी

अपमान की आँच में

पिघल गया

दासता में बन्धे

पासों ने भी

हस्तलाघव मानने से इन्कार कर दिया

और

कालखण्ड विदा हो गया !

कवि परिचय : इस आलेख के कवि श्री महेंद्रनाथ गोस्वामी सुधाकरकिसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। ये हिंदी और खोरठा के जाने माने साहित्यकार होने के साथ साथ रंगमंच के भी उम्दा कलाकार हैं। झारखण्ड सरकार के कथा संगम, खोरठा रत्न, श्रीनिवास पानुरी खोरठा प्रबुद्ध सम्मान सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित महेन्द्रनाथ की कई रचनाएँ देश के प्राय: सभी प्रमुख अखबारों, पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। इनके द्वारा खोरठा में लिखी कई किताबें झारखण्ड के विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल हैं।

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