गणेश महोत्सव को लेकर तैयारी जोरों पर, बनाये जा रहे है भव्य पंडाल
गिरिडीह झारखंड धर्म

गणेश महोत्सव को लेकर तैयारी जोरों पर, बनाये जा रहे है भव्य पंडाल

सोमवार को भव्य गणेश प्रतिमा स्थापित कर होगी पूजा अर्चना

गिरिडीह। गणेश चतुर्थी हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है. इसे विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता भगवान  गणेश का जन्म हुआ था। इस पर्व को देश भर में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है, लेकिन खास तौर से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में गणेश महोत्सव की धूम देखते ही बनती है। गिरिडीह में भी विगत कई वर्षों से गणेश महोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। सोमवार को गणेश चतुर्थी होने के कारण विभिन्न पूजा समितियों के द्वारा जोर शोर से तैयारी की जा रही है।

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केन्द्रीय पूजा समिति के अलावे कई संगठनों के द्वारा की जा रही है तेयारी

शहर के टावर चैक स्थित शिव महावीर मंदिर में श्री गणेश महोत्सव केन्द्रीय पूजा समिति द्वारा विगत 20 वर्षों से गणेश महोत्सव मनाया जा रहा है। वहीं शहर के नगिना सिंह रोड, आजाद नगर, धोबिया गली, बड़ा चैक, हुट्टी बाजार, श्रीश्री आदी दुर्गा मंडप, बोड़ो सहित शहर के विभिन्न मुहल्लों में पूजा समितियों के द्वारा भव्य रूप से गणेश महोत्सव की तैयारी की गई है। इस दौरान पूजा समितियों के द्वारा जहां भव्य पंडाल बनाये गये है। वहीं सोमवार को पंडाल में भव्य गणेश प्रतिमा स्थापित कर पूजा की तैयारी की जा रही है।

गणेश चतुर्थी की तिथि और स्थापना का शुभ मुहूर्त

पुरोहितों के अनुसार गणेश चतुर्थी की 02 सितंबर को सुबह 4 बजकर 57 मिनट से प्रारंभ होगी। जो 03 सितंबर की रात करीब एक बजकर 54 मिनट तक रहेगा। गणपति की स्थापना और पूजा का समय 02 सितंबर की सुबह 11 बजकर 05 मिनट से दोपहर 01 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। बताया कि गणेश चतुर्थी के दौरान चंद्रमा नहीं देखना चाहिए। इस बार दो  सितंबर को सुबह आठ बजकर 55 मिनट से रात 9 बजकर 05 मिनट तक चंद्रमा देखना वर्जित है।

गणेश चतुर्थी का महत्व

हिन्दू धर्म में भगवान गणेश का विशेष स्थान है। कोई भी पूजा, हवन या मांगलिक कार्य उनकी स्तुति के बिना अधूरा है। हिन्दूओं में गणेश वंदना के साथ ही किसी नए काम की शुरुआत होती है। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी यानी कि भगवान गणेश के जन्मदिवस को देश भर में पूरे विधि-विधान और उत्साह के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में तो इस पर्व की छटा देखते ही बनती है। सिर्फ चतुर्थी के दिन ही नहीं बल्कि भगवान गणेश का जन्म उत्सव पूरे 10 दिन यानी कि अनंत चतुर्दशी तक मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी का सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व ही नहीं है बल्कि यह राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने तो अपने शासन काल में राष्ट्रीय संस्कृति और एकता को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक रूप से गणेश पूजन की शुरुआत की थी।

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