मारवाड़ी महिला समिति के “झूम उठो राजस्थान” कार्यक्रम में झूमा गिरिडीह
गिरिडीह झारखंड

मारवाड़ी महिला समिति के “झूम उठो राजस्थान” कार्यक्रम में झूमा गिरिडीह

15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का नगर भवन में हुआ रंगारंग समापन

गिरिडीह। मारवाड़ी महिला समिति की झूम उठो राजस्थान कार्यक्रम में शनिवार की शाम गिरिडीह शहर वाकई नगर भवन में झूम उठा। राजस्थान की लोकनृत्य से सराबोर पूरा कार्यक्रम रहा। महिला समिति के 15 दिवसीय राजस्थानी फोंक नृत्य प्रशिक्षण शिविर का समापन शनिवार को नगर भवन में किया गया। 15 दिवसीय प्रशिक्षण की प्रशिक्षिका और राजस्थान के उदयपुर से आई प्रसिद्ध नृत्यागंना शकुंतला पवार के नेत्तृव में प्रतिभागियों ने जहां राजस्थान के प्रचलित गीतों पर लोकनृत्य पेश की। वहीं झूम उठो राजस्थान के समापन कार्यक्रम की शुरुआत एसपी सुरेन्द्र झा, स्थानीय विधायक निर्भय शाहाबादी, समाजसेवी अशोक जैन, अमजीत सिंह सलूजा, समिति की अध्यक्ष माया बसावतिया और सचिव अरुणा खंडेलवाल ने दीप जलाकर किया। मौके पर गणेश वंदना भजन पर एक प्रतिभागी ने आर्कषक नृत्य पेश की।

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प्रतिभागियों ने प्रस्तुत की कालबेलिया अगचरी समेत कई राजस्थानी नृत्य

मारवाड़ी महिला समिति के “झूम उठो राजस्थान” कार्यक्रम में झूमा गिरिडीह

इस दौरान नृत्यागंना शंकुतला व उनके पति गोवर्धन पंवार के नेत्तृव में प्रतिभागी लक्ष्मी शर्मा, कविता राजगढ़िया, चंचल भदानी, माही शर्मा समेत कई प्रतिभागियों ने मौके पर राजस्थान की भंवई, अगचरी, कालबेलिया समेत राजस्थान की लोकनृत्यों को पेश की। जिसमें दर्शकों को अगचरी सबसे अधिक मंत्रमुग्ध किया। एक मटके के उपर करीब आधा दर्जन मटका लिए प्रतिभागियों ने थाली पर खड़े हो कर और शीशे के ढेर पर नृत्य की, तो समिति की सदस्याएं भी झूम उठी। दर्शक इस बीच अगचरी का नृत्य देख भी मंत्रमुग्ध हुए।

राजस्थान में हुआ फोंक नृत्य का जन्म

समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नृत्यागंना शकंुतला ने कहा कि फोंक नृत्य का जन्म ही राजस्थान में हुआ था। शकुंतला पंवार ने कहा कि भारत की संस्कृति का नाम ही राजस्थान का लोकनृत्य है। जिसे यहां की महिलाओं व युवतियों को 15 दिनों में प्रशिक्षित किया गया। कार्यक्रम के दौरान पूरा नगर भवन दर्शकों से खचाखच भरा था। महिलाओं से लेकर युवतियां और शहर के गणमान्य लोग शामिल हुए।

नृत्यागंना शंकुतला को किया सम्मानित

इधर झूम उठो कार्यक्रम को लेकर समिति की पदाधिकारियों ने नृत्यागंना शकुंतला व उनके पति का सम्मान अंगवस्त्र पहनाकर किया। वहीं कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति की तूलिका सरावगी, सरोज केजरीवाल, सुषमा जैन ने महत्पूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में शहर के लखी गौरिसरिया, प्रदीप अग्रवाल, शिवकुमार बगेड़िया, दीपक शर्मा समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे। कार्यक्रम में ही समिति की और से अंगदान से जुड़े संदेश के कार्ड बोर्ड भी लगाएं गए थे। जिसमें नेत्रदान के अलावे अन्य अंगो के दान को महत्पूर्ण बताया गया था।

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