झारखंडीधाम: जहां साक्षात विराजमान है भगवान शिव

झारखंडीधाम: जहां साक्षात विराजमान है भगवान शिव

भक्तों को दर्शन देने के साथ ही हरते हैं उनके कष्ट

रिपोर्ट: रिंकेश कुमार

गिरिडीह। झारखंडीधाम, झारखंड के गिरिडीह ज़िले का एक ऐसा धाम, जहां साक्षात भगवान शिव विराजमान हैं। यहां आने वाले भक्तों की न सिर्फ सभी मुरादें पूरी होती हैं, बल्कि रोगी को निरोगी व विकलांग को पूर्ण काया भी मिलती है। असाध्य रोग से पीड़ित कई लोग बाबा के यहां धरना देकर स्वस्थ काया प्राप्त होने के बाद ही लौटते हैं। जी हां जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है झारखंडी धाम, जहां न सिर्फ श्रावण में बल्कि सालों भर भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है। यहाँ पर विराजमान बाबा भोले की प्रसिद्धि ऐसी कि किसी भी परेशानी में होने पर भक्त यहां दौड़े चले आते हैं। बाबा भोले भी भक्तों पर अपनी असीम कृपा बरसाने के साथ ही विभिन्न रूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं।

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आज भी अधुरा है मंदिर का छत

झारखंडीधाम: जहां साक्षात विराजमान है भगवान शिव

कहा जाता है की झारखंडीधाम में मंदिर निर्माण के समय छत अधुरा रह गया था, उस वक्त से आजतक छत को पूरा नहीं किया जा सका।  छत को पूरा करने के लिए समय-समय पर भक्तों ने काम लगवाया, लेकिन हर बार किसी न किसी तरह छत गिर जाता है। जिसकी वजह से आज भी मंदिर का छत अधुरा है।

धरना के बाद किडनी रोग से मिली राहत

जमुआ प्रखंड के रहने वाले डालेश्वर पंडित विगत दस वर्षों से बाबा के दरबार में धरना दिये हुए हैं। वे किडनी रोग से ग्रसित थे। लेकिन बाबा के प्रति आस्था और विश्वास की वजह से आज वे पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उनका कहना है कि जब चिकित्सकों ने उन्हें जवाब दे दिया तो वे बाबा झारखंडी धाम के दरबार में धरना देने आ गये। जिसके परिणाम स्वरूप आज वे पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उनका रोग करीब करीब ठीक हो चुका है। बाबा के आदेश के बाद ही वे यहां से अपने घर जायेंगे।

सिर्फ एक समय दूध पीकर बाबा की आराधना में लीन है भक्त मंजू

इसी प्रखंड के दुखिपेसरा की रहने वाली मंजू देवी विगत 6 वर्षों से न सिर्फ झारखंडी धाम में धरना दे रही हैं, बल्कि वे 24 घंटे में सिर्फ एक समय दूध पीकर बाबा की आराधना में लगी हुई हैं। न अन्न और न ही जल ग्रहण करने के बावजूद वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उनका कहना है कि बाबा अक्सर किसी न किसी रूप में दर्शन देते हैं और बाबा के बुलावे पर ही वे यहां पर धरना दे रही हैं।

शिवभक्ति से मोहन की दूर हुई विकलांगता

लेदा के रहने वाले मोहन विश्वकर्मा शरीर से पूरी तरह से लाचार थे। वे चल नहीं पाते थे। वे जब बाबा के दरबार में धरना देने पहुंचे तो किसी तरह से जमीन पर घिसट घिसट कर आगे बढ़ रहे थे। लेकिन बाबा के दरबार में धरना देने और प्रतिदिन प्रसाद के रूप में बेलपत्र ग्रहण करने के कारण आज वे अपने पैरों पर खड़े हो चुके हैं। उनके शरीर की विकलांगता करीब करीब बाबा की कृपा से खत्म हो चुकी है। ऐसे ही कई भक्त हैं जो अपनी समस्याओं को लेकर बाबा के दरबार में धरना दे रहे है।

भक्तों की मन्नत को पूरा करते हैं बाबा: मनोज पंडा

झारखंडधाम के पुजारी व समिति के पदाधिकारी मनोज पंडा की मानें तो बाबा की लीला अपरम्पार है। यहां जो भी भक्त सच्चे दिल से मन्नत मांगते हैं बाबा उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। बाबा की लीला ऐसी है कि वे समय-समय पर भक्तों को अलग-अलग रूपों में दर्शन देने के साथ ही उनके कष्टों को भी दूर करते हैं।

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