मधुपुर में समारोह पूर्वक मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस
झारखंड

मधुपुर में समारोह पूर्वक मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस

आदिवासी समाज के बलिदान से ही अस्तित्व में आया झारखंड

मधुपुर। मधुपुर महाविद्यालय के सभागार में शुक्रवार को विश्व आदिवासी दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि नगर परिषद उपाध्यक्ष जियाउल हक टार्जन, प्रभारी प्राचार्य डॉ पीके राय, पूर्व प्रभारी प्राचार्य डॉक्टर एनसी झा ने संयुक्त रूप से सिद्धू कान्हू मुर्मू और डॉ भीमराव अंबेडकर की तस्वीर पर माल्यार्पण कर तथा कैंडल जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। आदिवासी छात्र-छात्राओं ने कुलगीत व स्वागत गान गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की।

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आदिवासियों के घर स्वच्छता का प्रतिक

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर परिषद के उपाध्यक्ष जियाउल हक टार्जन ने कहा कि आदिवासी छात्रों को इतिहास बनाना है, तो संघर्ष करना होगा। क्योंकि इनके पूर्वजों ने अपने बलिदान देकर इस राज्य को अस्तित्व में लाया है। प्रभारी प्राचार्य डॉ पीके राय ने कहा कि आज हम सभी जिस स्वच्छ भारत अभियान की परिकल्पना कर रहे हैं। उसे हम आदिवासियों से सीख सकते हैं। क्योंकि आप उनके घर और आंगन को देख सकते हैं जो स्वच्छता का संदेश देती है। गांधी जी ने 9 अगस्त को ही करो या मरो आंदोलन की शुरुआत की थी और उनके इस आंदोलन में आदिवासी समुदाय ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। इसलिए 9 अगस्त को ही यूएनओ ने भी विश्व आदिवासी दिवस की घोषणा की।

दिवस मनाने के साथ ही संस्कार और संस्कृति की रक्षा भी जरूरी

पूर्व प्रभारी प्राचार्य डॉक्टर एनसी झा ने कहा कि सिर्फ दिवस मनाने से कुछ नहीं होगा बल्कि हमें अपने संस्कार और संस्कृति की रक्षा करनी होगी। तभी इस दिवस की सार्थकता सिद्ध होगी। समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ रत्नाकर भारती ने कहा कि आदिवासी जागेंगे तभी उनका उत्थान होगा। उन्हें हडीया, माडी, शराब आदि की परंपराओं को दूर करना होगा। और शिक्षा के प्रति अपनी जिज्ञासा बढ़ानी होगी। हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ रंजीत कुमार ने कहा कि आदिवासी समुदाय के लोग काफी मेहनती संघर्षशील और इमानदार होते हैं। इतिहास गवाह है कि उन्होंने अपने बलिदान से भारत को परतंत्रता की बेड़ियों से आजाद कराया था।

महाभारत के समय से आदिवासी समुदाय का अस्तित्व

संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राणा प्रताप सिंह ने कहा कि महाभारत कालीन समय से आदिवासी समुदाय का अस्तित्व है। वे शिक्षित थे तभी भारत के प्रथम नागरिक भी आदिवासी ही बने। इतिहास विभाग के सत्यम कुमार ने कहा कि छात्रों को शिक्षित होना होगा तभी इस दिवस की सार्थकता होगी। मौके पर डॉ भरत प्रसाद, डॉ अश्विनी कुमार, डॉक्टर नीलम शुक्ला, रंजीत प्रसाद, आशुतोष कुमार, चंदा सहाय, मृणालिनी वर्मा, गोपाल चंद्र राय, अवधेश नंदन सिंह, शिवनंदन राय, रामचंद्र झा, आशुतोष लाला, सिकंदर, प्रियतोश, अंशु, टुनटुन, कैलाश, कुंदन, संजय, मुकेश, प्रकाश समेत सैकड़ों छात्र-छात्राएं मौजूद थे।

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