तिसरी के राशन डीलर का अगवा बेटा अंकित आठ दिनों बाद लौटा अपने घर

तिसरी के राशन डीलर का अगवा बेटा अंकित आठ दिनों बाद लौटा अपने घर

शनिवार अहले सुबह बेटे को देख माता-पिता ने ली राहत की सांस

गिरिडीहः तिसरी के खटपोक गांव के राशन डीलर अशोक बरनवाल का बेटा अंकित बरनवाल आठ दिनों बाद अपहरणकर्ताओं से मुक्त हो कर शनिवार की अहले सुबह सकुशल घर लौट आया। तिसरी थाना प्रभारी लक्ष्मेशवर चौधरी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छात्र अंकित शनिवार की सुबह करीब तीन बजे सकुशल घर लौट आया है।

आठ दिनों तक आंखों पर पट्टी बांधकर रखा अपहर्ताओं ने

घर लौटने के बाद भी छात्र अंकित बरनवाल काफी सदमे में है और डरा हुआ है। शरीर पर जख्म के निशान भी साफ तौर पर नजर आ रहै हैं। ऐसे में अंकित कुछ बोलने की स्थिति में भी नहीं है। वैसे अपहरणकर्ताओं के चंगुल से अंकित खुद को बचाने में सफल रहा, या छात्र के पिता को बेटे को मुक्त कराने के लिए फिरौती देनी पड़ी, इस पर अब भी संशय बना हुआ है। हालांकि तिसरी थाना प्रभारी लक्ष्मेशवर चौधरी का दावा है कि जिस दिन से छात्र का अपहरण हुआ, उस दिन से ही तिसरी पुलिस लगातार जमुई और तिसरी के सीमावर्ती जंगलों में छापेमारी कर रही थी। लिहाजा, पुलिस दबाव के कारण अपहरणकर्ताओं ने अंकित को मुक्त किया है। वैसे अंकित के लौटने के बाद यह साफ हो गया कि अंकित का अपहरण अपराधियों ने किया था। जिसका संपर्क बिहार के जमुई जिले से बताया जा रहा है।

अपहरण की रात 16 घंटे अपहरणकर्ताओं के साथ पैदल चला था अंकित

इधर आठ दिनों बाद छात्र के लौटने के बाद तिसरी पुलिस अपहरणकर्ताओं की तलाश में शनिवार सारा दिन बिहार-झारखंड के गिरिडीह-तिसरी के सीमावर्ती जंगलो में खाक छानती रही।

जानकारी के अनुसार अपहृत छात्र अंकित बरनवाल जमुई के बीहड जंगलो से गुजरते हुए गिरिडीह के तिसरी सीमावर्ती क्षेत्र में अहले सुबह देर रात करीब तीन बजे पहुंचा। खटपोंक गांव के कलवा नदी पहुंचने के बाद अंकित ने खुद को सुरक्षित समझा, क्योंकि कलवा नदी से अंकित का घर महज पांच सौ मीटर था। कलवा नदी का इलाका भी पूरी तरह से बीहड जंगलों के बीच ही है। इसी कलवा नदी को क्रास कर अपहरणकर्ताओं द्वारा छात्र अंकित को ले जाने की बात भी कही जा रही है। स्थानीय लोगों ने अंकित को घर पहुंचाया। इधर घर लौटने के बाद अंकित ने माता-पिता को सिर्फ इतना बताया कि पिछले शनिवार को उसका अपहरण करने के बाद अपहरणकर्ता उसे लगातार 16 घंटे पैदल लेकर चलेे। इस दौरान कुछ लोगों ने उसे पीटा भी। जितने दिन वह अपहरणकर्ताओं के चंगुल में रहा, उतने दिन उसकी आंखों पर पट्टी बंधी रही। लिहाजा, वह कहां था, इसका पता उसे भी नहीं चल पाया। लेकिन उसे बीहड जंगल में रखा जा रहा था। बताया कि हर रोज उसे दिन में चूडा और सत्तू खाने के लिए दिया जाता था। वहीं उसका अपहरण किसलिए किया गया, इसकी जानकारी उसे नहीं है।

सीधी नजर देखें सिटी केबल के 277 नम्बर और हमारे youtube चैनल पर

ख़बरों से अपडेट रहने के लिए जुड़े हमारे व्हाट्सएप ग्रुप एवं फेसबुक पेज से….