आशियाने की ललक में हुए दो जून की रोटी को मोहताज

आशियाने की ललक में हुए दो जून की रोटी को मोहताज

जमीन माफियाओं के चक्कर में पड़कर नाजिर ने खोये रिटायरमेंट के रूपये

रिपोर्ट-कंचन सिन्हा

जमुआ(गिरिडीह)। जिंदगी का आखिरी लम्हा पुरा शुकून हो। एक आशियाना अपना हो, परिवार में खुशहाली हो तो मालिक की इबादत के साथ जिंदगी का आखिरी सफर भी बेहतरिन हो जाता है, यही तमन्ना लिए धनबाद के पुटकी कोलियरी से सेवानिवृत्त हुए नजीर खान किसी हमनवां की सलाह पर अपने तीन दिव्यांग पुत्रों समेत जमुआ को अपना नया ठिकाना बनाने को सोचा। साथ में सेवानिवृति में मिले लगभग 29 लाख रुपये भी थे। बीते 02 मई 2013 को नजीर सपरिवार जमुआ के काजीमगहा में आकर एक किराये के मकान में रहने लगे। कुछ ही दिनों में ही नजीर को काजीमगहा में कुछ लोगों से गहरी घनिष्टता भी हो गई।

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विवादित जमीन रजिस्ट्री कराकर फंसाया

जमुआ की आबोहवा नजीर को अच्छी लगने लगी। सबकुछ ठीक ठाक चल रहा था पर खुद के आशियाने की ललक ने नाजीर के जिंदगी की आखिरी लम्हें को दो जून की रोटी का मोहताज बना दिया। नजीर की ललक को जमीन के तथाकथित कारोबारियों ने ताड़ा और नजीर को समझा कर उसके नाम जमुआ के पोबी पंचायत के तेतरआमो रैयोडीह की एक विवादित जमीन रजिस्ट्री करवा दी। जमीन लिए छह वर्ष गुजरने के बाद भी नजीर उस जमीन को हासिल नहीं कर सके है। इस बीच नजीर जमुआ थाना, पुलिस कप्तान से लेकर समाज के कई गणमान्यों के यहां चक्कर पर चक्कर काटते रहे, सभी ने काम करवा देने के बहाने उसे लूटता रहा लेकिन किसी ने कोई मदद नहीं की।

न्यायालय के शरण में गये नाजीर

अंततः हार कर नाजीर न्यायालय के शरण में गये जमीन रजिस्ट्री में मीडियेटर बने काजीमगहा निवासी मो. तसौवर एवं सरफुद्दीन अंसारी तथा पैसा लेकर जमीन रजिस्ट्री करने वाले शशिभूषण सिन्हा, किशोर कुमार सिंह, विकाश सिन्हा के ऊपर पैसा ठगने और धोखाघड़ी करने का मुकदमा दर्ज कर इंसाफ की गुहार लगाई है।

करीब 40 लाख ठगी का लगाया आरोप

बकौल नाजीर खान ने कहा कि सभी ने मुझे बुरी तरह ठगा, मुझे रिटायरमेंट में मिले 29 लाख रुपये समेत, मेरे घर के जेवर और पहले के फिक्सड किये हुए पैसे सभी मिलाकर तकरीबन 40 से 42 लाख रुपये इन लोगों ने मिलकर ठग लिए। अब मेरे पास फूटी कौड़ी तक नहीं है। मैं यहां किराये के मकान में हूँ। मेरे तीन पुत्र विकलांग है, मेरी एक पुत्री को उसके ससुराल वाले भगा दिए हैं जो मेरे साथ हीं रहती है। एक बड़े पुत्र का विवाह किया हूं, बहु और उसके बच्चे समेत 15 सदस्यों का परिवार है मेरा। मुझे दवाई भी खरीदनी पड़ती है और अनाज भी।

थाना से लेकर कोर्ट तक लुटेरों व ठगों का राज

कहा कि वे विश्वास कर जमुआ आये थे लेकिन ठगों ने उनके पास कुछ नहीं छोड़ा। यहां थाना से लेकर कोर्ट तक लुटेरों और ठगों का ही राज चलता है। कहा कि वे हर एक के दरवाजे पर गया लेकिन किसी ने मदद नहीं की। यहां मानवता, संगठन, समाज, अंजुमन, प्रशासन, न्यायालय सभी निष्ठुर और अमानवीय है। मेरा परिवार भूखों मर रहा है, मेरी कोई मदद नहीं करता और मुझे ठगने वाले सभी समाज में ओहदेदार बने बैठे हैं। कहा यदि मुझे इंसाफ न मिला तो मैं सपरिवार आत्महत्या को मजबूर होगें।

आरोप को बताया गलत

इधर उक्त मामले में मीडिएटर रहे तसौवर अली एवं सरफुद्दीन अंसारी ने बताया कि उनलोगों का इस मामले में कोई भूमिका नही है, इन्हें मना करने के बावजूद खुद से जमीन रजिस्ट्री करवाई है। कितने में जमीन खरीदी यह भी हमलोगों को पता नहीं है। उलटे नाजीर खान ने हमलोगों पर धोखा धड़ी का मुकदमा भी कर दिया है, जो गलत है।

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