जयप्रकाश के लिए लक्ष्मण नही प्रणव बनेंगे परेशानी का सबब
गिरिडीह झारखंड राजनीति

जयप्रकाश के लिए लक्ष्मण नही प्रणव बनेंगे परेशानी का सबब

चंद दिनों में भाजपा में शामिल होंगे लक्ष्मण स्वर्णकार

अभय वर्मा

गिरिडीह। झाविमो से रूसवायी के बाद पूर्व विधायक लक्ष्मण स्वर्णकार भाजपा में शामिल होंगे, इसमें कहीं कोई शक की गुंजाईश नहीं है। पर स्वर्णकार गांडेय विधायक के लिए परेशानी का सबब नही बनेंगे। सूत्र की मानें तो स्वर्णकार भाजपा में शामिल होने के बाद संगठन में एडजस्ट किए जाएंगे। ऐसा नहीं है कि स्वर्णकार की चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं हो, पर उम्र उनके आड़े आ रही है। फिलहाल यहां प्रणव वर्मा की बात हो रही है। विदित हो कि कभी भाजपा के दिग्गज रहे स्व रीतलाल वर्मा के पुत्र प्रणव वर्मा का राजनीति में भाग्य ने साथ नहीं दिया। जब राज्य में भाजपा की तूती बोलती थी तब वह अन्य दल में थे। यह पहला मौका है जब देश व राज्य में भगवा रंग का जोर है और प्रणव इस दल के प्रदेश पदाधिकारी हैं।

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कभी दोनों के पिता थे भाजपा के स्तंभ

कोडरमा संसदीय क्षेत्र से पांच बार सांसद रहे रीतलाल प्रसाद वर्मा के रणनीतिकार उनके अग्रज स्व. जगदीश प्रसाद कुशवाहा हुआ करते थे। दोनो भाईयों के बीच की आपसी समझ इतनी अच्छी थी कि कभी एक-दूसरे के खिलाफ नहीं गए। लेकिन वर्तमान में दूसरी पीढ़ी के दोनों भाईयों के बीच की समझ इतनी अच्छी नहीं है। कई दलों के चक्कर मार फिलहाल दोनों एक दल में है। लोकसभा चुनाव के वक्त भाजपा में आए प्रणव के संदर्भ में कयास लगाया जा रहा था कि इन्हें पार्टी का टिकट दिया जाएगा। पर टिकट राजद से भाजपा में आयी अन्नपूर्णा देवी ने झटक लिया। संभवतः प्रणव को इस बार गांडेय से मौका दिया जा सकता है।

सरकार पर सवाल विधायक को पड़ सकता है मंहगा

कई मंचों से अपनी ही सरकार पर सवाल खड़ा करना गांडेय विधायक को मंहगा पड़ सकता है। पूर्व में विभिन्न मंचों से सरकार को कठघरे में खड़ा कर विधायक सीएम की आंख की किरकिरी बन गए थे, पर हालिया दिनों में उन्होंने इसकी भरपाई करने का भी प्रयास किया है। भाजपा सूत्र की मानें तो पार्टी के अंदर अब भी स्व. रीतलाल के प्रति बड़ा आदर है। हालांकि जीवन के अंतिम वर्षो में पूर्व सांसद भी भटकाव की स्थिति में रहे। पर राज्य में कई ऐसे है जिन्हें स्व. रीतलाल ने भाजपा में अंगुली पकड़ कर राजनीति सिखाई है। चार माह बाद इसका ऋण चुकाने का वक्त आएगा। पार्टी सूत्र की मानें तो लोस चुनाव में प्रणव ने जिस प्रकार सीएम के साथ मंच साझा किया है, वह कुछ और ही इशारा कर रहा है। उन इशारों में क्या संदेश छिपा है यह तो चार माह बाद ही उजागर होगा।

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