हाल-ए-सदर अस्पताल: लाखो खर्च के बावजूद व्यवस्था बेपटरी
गिरिडीह झारखंड

हाल-ए-सदर अस्पताल: लाखो खर्च के बावजूद व्यवस्था बेपटरी

लू पीड़ित को परिजनों ने लादकर एंबुलेंस तक पहुंचाया

गिरिडीह। लापरवाही की पर्याय बनी सदर अस्पताल में शनिवार को इसकी बानगी एक बार फिर देखी गई।  लाखों खर्च के बावजूद सदर अस्पताल की व्यवस्था अब भी बेपटरी दीख रही है। दावे तो आईसीयू जैसी सुविधा उपलब्ध कराने कि की जा रही है, पर बुनियादी सुविधाएं भी यहां मयस्सर नहीं है। शनिवार को सदर अस्पताल की व्यवस्था कुछ यूं ही नजर आयी। लू पीड़ित मोहनपुर निवासी राजू दास को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, यहां प्राथमिक चिकित्सा देने के बजाय तत्काल पीएमसीएच रेफर कर दिया गया। पर रेफर के बाद एंबुलेंस तक ले जाने का जो तरीका अपनाया गया, वह व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है।

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स्ट्रेचर की तलाश में भटकते रहे परिजन

शनिवार की सुबह करीब दस बजे 40 वर्षीय राजू दास परिजनों के साथ लू का इलाज कराने आए थे। रेफर के लिए प्रसिद्व सदर अस्पताल से राजू को भी तत्काल पीएमसीएच धनबाद रेफर कर दिया गया। परिजन स्ट्रेचर की तलाश में देर तक इधर-उधर भटकते रहे पर स्ट्रेचर कहीं नजर नहीं आया। मजबुर होकर परिजनों ने राजू को हाथों में उठाया और एंबुलेंस तक पहुंचाया।

सीधी नजर से बचते रहे उपाधीक्षक

व्यवस्था पर नजर रखने की जिम्मेवारी ढ़ो रहे सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ बीएन झा सीधी नजर के सवालों से बचते रहे। खुद का पल्ला झाड़ा और प्रबंधक से बात करने की नसीहत दी। इस बीच डॉ झा वहां से खिसक गए।

सदर अस्पताल में चार स्ट्रेचर: प्रबंधक

सदर अस्पताल के प्रबंधक प्रवीर मुर्मू ने दावा किया कि यहां चार स्ट्रेचर है। व्यवस्था का सारा दोष मुर्मू ने मरीजों के परिजनों पर डाल दिया। कहा कि जो जहां ले गया वहीं छोड़ आता है। पर सच्चाई यह है कि सदर अस्पताल में बेहतर स्थिति में मात्र एक स्ट्रेचर है।

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