शर्मनाक : तड़प कर हुई अज्ञात की मौत, मुकदर्शक बने रहे स्वास्थ्यकर्मी
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शर्मनाक : तड़प कर हुई अज्ञात की मौत, मूकदर्शक बने रहे स्वास्थ्यकर्मी

32 घंटे बेड पर तड़पता रहा अज्ञात अधेड़

रिपोर्ट : अभय वर्मा

गिरिडीह। लापरवाही तो सदर अस्पताल का पर्याय बन गई है, पर दर्जनभर चिकित्सकों के बावजूद इलाज के अभाव में किसी की जान चली जाये तो यह लापरवाही नहीं हत्या ही करार दी जाएगी। शब्द थोड़े कठोर हैं पर जिस किसी ने अज्ञात को सदर अस्पताल के बेड पर तड़पते देखा है वह इससे इंकार नहीं करेगा। जिस पचास वर्षीय अज्ञात अधेड़ की बात हो रही है, उसे मंगलवार की सुबह 4.30 में जमुआ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से सदर अस्पताल रेफर किया गया था, मिली जानकारी के अनुसार उसकी प्राथमिक चिकित्सा जमुआ में की गई।

सदर अस्पताल में अज्ञात की जान बचाने के लिए केवल स्लाइन लगा दिया गया। करीब 32 घंटे बेड पर तड़पने के बाद बुधवार की दोपहर 12 बजे के करीब उसने अंतिम सांसे ली। दो दिनों में सदर अस्पताल में इलाज को लेकर जो दिखा उससे साबित हो गया कि यहां इंसानी जान की कोई कीमत नहीं है।

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घायलावस्था में कराया गया था भर्ती

मंगलवार की सुबह घायलावस्था में अज्ञात मरीज को सदर अस्पताल में 108 एंबुलेंस के चालक पिंटु कुमार द्वारा जमुआ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से लाकर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रावधान के तहत घायलावस्था में अज्ञात आए तो नगर थाना को इसकी सूचना दी जाती है, तब घायल की देखरेख के लिए पुलिस की ओर से गार्ड मुहैया करायी जाती है, पर अस्पताल प्रबंधन ने न थाना को सूचना दी और ना ही उसके इलाज की समुचित व्यवस्था की गई। दोपहर बारह बजे मौत के बाद नगर थाना को तब सूचना दी गई जब सीधी नज़र की टीम ने उपाधीक्षक डॉ बीएन झा को अज्ञात मरीज की मौत की सूचना दी।

सरकार ने अज्ञात के इलाज के लिए की है व्यवस्था

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ झा ने कहा कि ऐसे घायलों के लिए सरकार की ओर से समुचित इलाज की व्यवस्था का प्रावाधान किया गया है। कहा कि इसके तहत दवा, इंजेक्शन सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराने का प्रावाधान है। पर भर्ती अज्ञात को स्लाइन के सिवा कुछ नहीं दिया गया। मौत की जानकारी दी गई तो कहा कि अब उसका पोस्टमार्टम होगा, तीन दिनों तक शव रखा जाएगा कोई नहीं आया तो उसकी अन्त्येष्टि कर दी जाएगी।

उपाधीक्षक से बात करेंगे : प्रबंधक

सदर अस्पताल के प्रबंधक प्रवीर मुर्मू व्यवस्था से इस कदर अंजान है कि 32 घंटे बाद उन्हें उपाधीक्षक से बात करने की याद आयी। दोपहर पौने बारह के करीब उनसे बात की गई तब उनका जवाब आया कि डीएस से बात कर पहले पुलिस को सूचना दी जाएगी, पर जब तक मुर्मू  बात कर कोई पहल करते तब तक अज्ञात की सांस की डोर टूट गई थी। यहां काबिलेगौर है कि सदर अस्पताल की व्यवस्था की निगरानी प्रबंधक को करनी है, पर वे खुद इतने लापरवाह हैं तो किसी दूसरे की सूध कैसे लेंगे?

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