टिकट काटे जाने से नाराज सांसद रवीन्द्र पांडेय हो सकते हैं हाथी पर सवार

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चुनाव के मद्देनजर लगातार कर रहे हैं बैठक

रिपोर्ट: रिंकेश कुमार

गिरिडीह। गिरिडीह लोकसभा सीट से पांच बार सांसद रह चुके रवीन्द्र पांडेय का इस बार टिकट काटे जाने से पांडेय न सिर्फ भाजपा से नाराज चल रहे हैं, बल्कि चुनावी मैदान में भी उतरने के लिए तैयार हैं। हालांकि पूर्व में टिकट के लिए झामुमो व जदयु के संर्पक रहने की बात सामने आ रही थी। लेकिन झामुमो से डुमरी विधायक जगरन्नाथ महतो को उम्मीदवार बनाये जाने के बाद अब श्री पांडेय द्वारख हाथी पर सवार होकर चुनावी मैदान में उतरने की बात सामने आ रही है। श्री पांडेय के करीबियों की माने तो वे बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं।

यहां तक कहा जा रहा है कि एक दो दिन में न सिर्फ बसपा में शामिल हो सकते हैं, बल्कि बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की भी घोषणा कर सकते हैं। हालांकि सांसद श्री पांडेय से जब दूरभाष पर बात की तो उन्होंने बसपा के संर्पक में रहने या टिकट लेने से साफ मना कर दिया।

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अपने लोगों से मिलकर कर रहे हैं रायशुमारी

चुनाव लड़ने की चाहत लिये सांसद पांडेय लगातार अपने कार्यकर्ताओं व सामाजिक लोगों के मन को टटोलने में लगे हुए हैं। वे पूरे क्षेत्र का दौरा करते हुए सभी लोगों से मुलाकात कर रहे हैं। इस क्रम में दो दिन पूर्व वे गिरिडीह भी आये थे और यहां पर अपने खास लोगों के अलावे पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ साथ कई समाज के पदाधिकारियों से भी मुलाकात की और उनसे चुनाव को लेकर रायशुमारी भी की।

लोकसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में नहीं पहुंचे सांसद

विदित हो कि इस बार पार्टी के आलाकमान द्वारा टिकट काटे जाने से सांसद पांडेय भाजपा से काफी नाराज चल रहे हैं। यही वजह है कि मंगलवार को गिरिडीह में आयोजित लोकसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में श्री पांडेय अनुपस्थित थे। जबकि सम्मेलन में प्रदेश संगठन मंत्री धर्मप्रकाश स्वयं उपस्थित थे। सम्मेलन के दौरान सांसद श्री पांडेय के करीबी माने जाने वाले पार्टी के कई नेताओं ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की।

बदल सकता है समीकरण

सांसद रवीन्द्र पांडेय अगर किसी भी दल से चुनावी मैदान में आते हैं तो गिरिडीह लोकसभा का चुनावी समीकरण बदल सकता है। अब तक गिरिडीह लोकसभा में तीर धनुष व केला के बीच सीधा सीधा मुकाबला माना जा रहा है। लेकिन अगर श्री पांडेय हाथी पर सवार होकर आते हैं तो संसदीय क्षेत्र में त्रिकोणात्मक मुकाबला हो सकता है। हालांकि दल बदल कर चुनाव लड़ना श्री पांडेय के लिए कितना फायदेमंद होगा यह तो 23 मई को ही पता चलेगा। लेकिन चुनाव में श्री पांडेय के आने से गिरिडीह संसदीय क्षेत्र में होने वाला चुनाव काफी रोमांचक होगा।

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