गिरिडीह लोस सीट पर आजसू ही देगी उम्मीदवार, संशय पर लगा विराम

गिरिडीह लोस सीट पर आजसू ही देगी उम्मीदवार, संशय पर लगा विराम
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रिपोर्ट : अभय वर्मा

गिरिडीह। रांची में बनी सहमति के बाद गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र में एनडीए घटक दल में उम्मीदवारी को लेकर छायी धुंध साफ हो गई है। तेरह-एक के फार्मूले के बाद यह साफ हो गया कि राज्य में तेरह स्थानों पर भाजपा व गिरिडीह लोस क्षेत्र से आजसू चुनावी समर में उतरेगी। पांच बार के सांसद रहे भाजपा के रवीन्द्र पांडेय समर्थकों को आलाकमान के निर्णय के बाद भारी निराशा हुई है। पांडेय के समर्थक सोशल मीडिया के माध्यम से राजनीतिक फिजां में संशय की स्थिति बनाए हुए थे कि फिलहाल अंतिम निर्णय होना बाकी है। दरअसल भाजपा खेमे से सांसद के अलावा बाघमारा के विधायक ढुल्लु महतो व कमल संदेश पत्रिका के संपादक शिवशक्ति बक्शी की दावेदारी के बाद पार्टी के लिए यह तय करना कठिन हो रहा था कि चुनावी समर में किसे उतारा जाय।

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तीन के तिकड़म में फंसी थी भाजपा

इस बार के लोस चुनाव में गिरिडीह को लेकर भाजपा तीन के तिकड़म में फंसी हुई थी। बाघमारा विधायक और कमल संदेश पत्रिका के संपादक की दावेदारी के बात पार्टी को सांसत में डाली हुई थी। वहीं कार्यकर्ताओं का बड़ा वर्ग सांसद से नाराज चल रहा था। दो दिग्गजों की दावेदारी व भाजपा सर्वे टीम की रिपोर्ट भी सांसद के खिलाफ गई। रवीन्द्र की टिकट बरकरार रखी जाती तो विधायक कभी नहीं चाहते कि विजयी माला पांडेय को पहनायी जाय। महतो उम्मीदवार होते तो हार की पटकथा पांडेय तैयार करते। वहीं दोनो से अलग बक्शी को उम्मीदवार बनाया जाता तो दोनों ओर से भीतरघात की संभावना बढ़ जाती।

आजसू को नहीं मिलता सीट तो राज्य में बढ़ जाती भाजपा की परेशानी

गिरिडीह सीट पर अड़ी आजसू को यहां से टिकट नहीं मिलता तो भाजपा की परेशानी बाकी सीटों पर बढ़ जाती। सूत्र की मानें तो एनडीए गठबंधन से आजसू अलग होती तो 14 संसदीय क्षेत्र में अपना उम्मीदवार देती, इसका सारा नुकसान भाजपा को उठाना पड़ता। पर भाजपा ने एक तीर से कई निशाना साध दिया। आजसू को टिकट दे भाजपा ने घटक दल को शांत कर दिया वहीं अंदरूनी कलह पर विराम लगा दिया।

क्या रवीन्द्र तलाशेंगे अलग राह?

भाजपा टिकट की रेस से बाहर होने के बाद पांडेय समर्थक अब भी यह नहीं मान रहे हैं कि रवीन्द्र पांडेय चुनावी खेल से बाहर हो गए हैं। अति विश्वसनीय सूत्र की मानें तो भाजपा टिकट से वंचित पांडेय किसी क्षेत्रीय दल से चुनाव की अगली पारी खेलेंगे। समर्थक यह भी दलील दे रहे हैं कि भाजपा के होने से पूर्व की रात तक पांडेय कांग्रेस के जिलाध्यक्ष थे। कहा जाता है कि इतिहास खुद को दोहराता है, अब पांडेय के समक्ष यक्ष प्रश्न है कि क्या वह पूर्व के इतिहास दोहराएंगे।

आजसू खेमे में कई उम्मीदवार

आजसू के हिस्से आयी गिरिडीह लोस क्षेत्र के बाद दल में कई उम्मीदवार अपनी दावेदारी कर रहे हैं। चर्चा के अनुसार पार्टी सुप्रीमो सुदेश महतो की संसदीय चुनाव में उतरने की इच्छा जागृत हुई तो बाकी के उम्मीदवारी पर पानी फिर जाएगा। पार्टी सुप्रीमो लोस चुनाव से अलग हुए तो राज्य के काबिना मंत्री चन्द्रप्रकाश चौधरी, लंबोदर महतो व राजकिशोर महतो टिकट के मजबूत दावेदार हैं। मिली जानकारी के अनुसार आगामी 23 मार्च को टिकट का अंतिम निर्णय होना है, तब तक केवल कयास ही लगाया जा सकता है।

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