सदर अस्पताल में जंग खा रही हैं लाखों की मशीनें, बाहरी चकाचौंध पर करोड़ों खर्च

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ऊंची दुकान-फीकी पकवान का नायाब उदाहरण है गिरिडीह सदर अस्पताल

रिपोर्ट : अभय वर्मा

गिरिडीह। कीमती सामानों की बर्बादी देखनी हो तो सदर अस्पताल का दीदार कर लें। चंद खर्च के लिए यहां लाखों की मशीन जंग खा रही है या गोदाम में रख दी गई है। सदर अस्पताल में व्यवस्था सुधार की बजाय भव्य भवन में चमक बिखेरी जा रही है। साल दर साल व्यवस्था सुधार के लिए कई कीमती सामान मंगवायी गई पर इनमें से कई ऐसे हैं जो वर्षों से खराब पड़ी हैं।

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27.54 लाख का इंसीनरेटर उद्घाटन के दिन से खराब

सदर अस्पताल में जंग खा रही हैं लाखों की मशीनें, बाहरी चकाचौंध पर करोड़ों खर्च

सदर अस्पताल सहित शहर व आसपास स्थित नर्सिंग होम के कचरा प्रबंधन के लिए सदर अस्पताल में 27.54 लाख का इंसीनेटर मंगवाया गया था। इसे खड़ा करने सहित अन्य खर्च मिलाकर कुल 32 लाख की राशि की लागत आयी। सूत्रों की मानें तो उद्घाटन के दिन से ही इसका एक चैंबर खराब है, बावजूद कई पूर्व सीएस ने नर्सिंग होम संचालकों के साथ कचरा प्रबंधन पर कई दौर की बैठक की। इंसीनरेटर किसकी दिमाग की उपज थी यह आजतक पता नहीं चल पाया।

यहां सबसे बड़ा सवाल है कि इंसीनरेटर शुरू भी होता है तो इसमें खर्च होने वाली डीजल की भरपाई कहां से की जाती। विदित हो कि एक घंटे के उपयोग में 60 लीटर डीजल की खपत होती। जानकारी के अनुसार फोंट सिस्टम कंपनी द्वारा यह सदर अस्पताल में आपूर्ति की गई थी। 27 लाख 54 हजार 823 रुपये की लागत से खरीदी गई। इस मशीन के संचालन की जिम्मेवारी गिरिडीह के अर्चना इंटरप्राइजेज को दी गई थी। 14 जून 2013 को अर्चना इंटरप्राइजेज से एकरारनामा किया गया था पर समय से पूर्व एजेंसी ने हाथ खड़े कर दिए।

बर्बाद हो गई 11 लाख की आटोमैटिक एनालाइजर

सदर अस्पताल में सर्वाधिक उपयोग की मशीन आॅटोमैटिक एनालाइजर समझी जा रही है। लेकिन 11 लाख की मशीन विगत आठ साल से खराब पड़ी है। इस मशीन की खासियत यह थी कि एक साथ इससे तीन दर्जन से अधिक प्रकार की जांच की जा सकती थी। डाॅ एके मिश्र के सिविल सर्जन रहते टुलीफ कंपनी द्वारा इसकी आपूर्ति की गई थी। दो दिनों की ट्रैनिंग के बाद मशीन में जांच का कार्य 2009 से शुरू की गई। लेकिन हाई वोल्टेज आने के कारण चंद दिनों बाद ही मशीन खराब हो गई। फिलहाल चैताडीह में बेकार पड़ी है।

फिर आयी जांच की अत्याधुनिक मशीन

11 लाख की आॅटोमैटिक एनालाइजर बेकार होने के बाद सदर अस्पताल में पुनः जांच की अत्याधुनिक मशीन मंगवायी गई। चैताडीह में गुजरात की बेकान कंपनी द्वारा सेमी आटोमैटिक जांच मशीन आपूर्ति की गई, पर यह चलती कितने दिनों तक इसका इंतजार किया जा रहा है।

कई संयत्र हैं कमरे में बंद

सदर अस्पताल व चैताडीह में रोगियों की भीड़ व रंग रोगन से चमकदार हुई भव्य भवन देख कई लोग धोखा खा जाएंगे। पर कई मामले में व्यवस्था अब भी खोखली है। 1.75 लाख की अनुश्रवण यंत्र जिससे बहरापन का इलाज होता है, उद्घाटन के बाद से कमरे में बंद पड़ी है।  यह तभी खुलता है जब विभाग के आला अधिकारी या डीसी सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण करते है। केन्द्रीय टीम के दौरे के दौरान सदर अस्पताल में ईसीजी व अल्ट्रासाउंड मशीनें मंगवायी गई, लेकिन आज यह उपकरण कमरे में कैद पड़ी है।

सुधार का हो रहा है प्रयास – सिविल सर्जन

इस संदर्भ में सिविल सर्जन डाॅ रामरेखा प्रसाद ने कहा कि सदर अस्पताल की व्यवस्था में लगातार सुधार का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि जो मशीने खराब हैं उनकी वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

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