महिला दिवस विशेष : आधी आबादी को आज भी नहीं मिल रहे हैं पूरे अधिकार

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भारत में लैंगिक असमानता बड़ी चुनौती

रिपोर्ट : रिंकेश कुमार

गिरिडीह।  विश्व महिला दिवस पर पूरी दुनिया में महिला सशक्तिकरण और उनके अधिकारों को लेकर चर्चा हो रही है। महिलाओं को पुरुषों के बराबर कानूनी अधिकार और नारी शक्ति को सम्मान देने के लिए प्रत्येक वर्ष विश्व महिला दिवस मनाया जाता है। बावजूद आधी आबादी को आज भी लगभग पूरी दुनिया में बराबरी का अधिकार नहीं है। भारत समेत ज्यादातर विकसित राष्ट्रों में भी लैंगिक समानता की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

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चुनौतियों के बावजूद महिलाओं को नहीं मिल रहे समान अवसर

लैंगिग समानता को लेकर किए गए अध्ययन के अनुसार पूरी दुनिया में औसत अंक 74.71 है। मतलब विश्वभर में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले मात्र 75 फीसदी ही अधिकार प्राप्त है। कानूनी अड़चनें महिला रोजगार और महिला उद्यमिता की राह में रोड़ा बनी हुई हैं। इस वजह से उन्हें अपने करियर में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बावजूद उन्हें सामान अवसर नहीं मिल पाते हैं। खासकर नीजि क्षेत्रों में नीति बनाने वाले बच्चों वाली महिलाओं को काम से हटाने में दिलचस्पी रखते हैं। दरअसल उन्हें लगता है कि बच्चे पैदा होने के बाद महिलाएं पहले की तरह पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाती हैं।

विकसित देशों में भी महिलाओं की स्थिति सही नहीं

जब बात महिला अधिकारों की होती है तो जेहन में विकसित देशों की छवि उभरती है। ज्यादातर लोगों का मानना है कि विकसित देशों में महिलाओं को पुरुषों के बराबर कानूनी अधिकार मिले हुए हैं, जो सच नहीं है। अमेरिका को इस रिपोर्ट में 83.75 अंक, हासिल हुए हैं। वहीं यूनाइटेड किंगडम को 97.5 फीसद, जर्मनी को 91.88 और ऑस्ट्रेलिया को 96.88 अंक प्राप्त हुए हैं। अमेरिका लैंगिग समानता वाले टॉप 50 देशों में भी शामिल नहीं है।

महिलाओं को अपना आत्मबल बढ़ाना होगा : पूनम प्रकाश

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महिला आयोग की सदस्य सह भाजपा नेत्री पूनम प्रकाश की माने तो अब महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। भाजपा सरकार के कार्यकाल में महिलाओं को सम्मान मिला है, लेकिन महिलाओं को आज भी कई स्थानों पर काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। कहा कि महिलाओं को अपने हक और अधिकार को पाने के लिए अपने आत्मबल को बढ़ाना होगा। तभी वे समान सम्मान को प्राप्त कर पायेंगी।

महिलाओं को मिले हर तरह का संरक्षण : रागिनी लेहरी

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भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रागिनी लेहरी की माने तो महिलाएं समाज और परिवार के लिए रीढ़ की हड्डी होती हैं। आज महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। घर के चूल्हा चौका से निकल कर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में अपनी एक पहचान बना रही हैं। सरकार भी महिलाओं को सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक हर क्षेत्र में मदद कर रही है। इसलिए महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में संरक्षण प्राप्त मिलना चाहिए।

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