गिरिडीह : उद्घाटन के बाद भी नहीं खुला हीमोफीलिया डे केयर सेंटर

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फंड के बावजूद दवा की नहीं हुई खरीदी, अस्पताल प्रबंधन लापरवाह

रिपोर्ट: अभय वर्मा

गिरिडीह। फंड के अभाव में योजना अटकी रहे तो बात समझ आती है, पर जिस योजना के लिए विगत छः माह से फंड में 60 लाख की राशि पड़ी हो और केन्द्र बंद पड़ा हो, यह बात किसी को हजम नहीं होगी। पर गिरिडीह में हीमोफीलिया डे केयर सेंटर का कुछ ऐसा ही हाल है। पूरे तामझाम के साथ सदर अस्पताल परिसर में जनवरी माह के शुरुआती सप्ताह में केन्द्र का उद्घाटन किया गया, पर दवा के अभाव में अब तक इसकी शुरुआत नहीं की गई है। सबसे चकित करने वाली बात यह है कि जब केन्द्र में दवा ही नहीं थी तो केन्द्र का उद्घाटन क्यों किया गया। इसे गिरिडीह के हीमोफीलिया पीड़ित लोगों के साथ मजाक ही कहा जा सकता है।

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फंड में 60 लाख होने पर भी नहीं खरीदी दवा

हीमोफीलिया सोसाइटी के प्रदेश सचिव संतोष जायसवाल की मानें तो डे केयर सेंटर में दवा खरीदी के लिए फंड में 60 लाख की राशि पड़ी है। कहा कि ऐसी स्थिति में स्टेट पर सवाल उठाया जाएगा पर यहां सारी जिम्मेवारी सिविल सर्जन की है। उन्होंने कहा कि सबसे दुखद पहलू यह है कि प्रोविजनल बजट का उपयोग नहीं हुआ तो अगली बार इसमें भारी कटौती की जाएगी। मसलन 20 लाख की राशि शेष रह गई तो अगली बजट में 40 लाख की कटौती कर ली जाएगी। जायसवाल ने कहा कि जीवन रक्षक दवा से संबंधित मामले में स्टेट में एक साथ टेंडर होना चाहिए, कहा कि अलग-अलग टेंडर की क्या जरूरत है।

हीमोफीलिया के 70 निबंधित रोगी

जानकारी के अनुसार गिरिडीह में केवल हीमोफीलिया के 70 निबंधित रोगी है। वहीं 160 के करीब थैलासिमिया के रोगी है, जिन्हें नियमित खून की जरूरत होती है। जायसवाल की मानें तो मानव शरीर में 13 कलाउउिंग फैक्टर होते है जिसमें 8 व 9 की कमी से हीमोफीलिया रोग होती है। उद्घाटन समारोह में सीएस ने दावा किया था कि एक सप्ताह में 60 लाख की दवा खरीदी जाएगी। यहां काबिलेगौर है कि एक-एक इंजेक्शन की कीमत 15 से 25 हजार की होती है। विदित हो कि केन्द्र में मरीजों को इलाज के साथ दवा भी निःशुल्क दी जाती।

लैप्स नहीं होगी राशि – सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डा रामरेखा प्रसाद ने कहा कि क्रय समिति की बैठक के बाद हीमोफीलिया डे केयर सेंटर के लिए दवा की खरीदी की जाएगी। क्रय समिति की बैठक कब होगी, इस सवाल पर सीएस चुप्पी साध गए। उन्होंने कहा कि एनआरएचएम योजना के तहत राशि का आवंटन किया गया है, कहा कि इसकी राशि लैप्स नहीं होती है। सवाल यह है कि इतनी महत्वपूर्ण मामले में भी ऐसी लापरवाही कहां तक जायज है। विदित हो कि रांची, जमशेदपुर व डालटनगंज के बाद गिरिडीह में चैथा केन्द्र का उद्घाटन किया गया था।

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