NEWSFLASH
• सीधी नज़र न्यूज़ में आप सभी का स्वागत है •
धनबाद के रंगकर्मी बलवंत को बनारस में मिला राष्ट्रीय सेतु सम्मान, लोगों ने दी बधाई
धनबाद के रंगकर्मी बलवंत को बनारस में मिला राष्ट्रीय सेतु सम्मान, लोगों ने बधाई

नाट्य क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए मिला सम्मान गिरिडीह । 27 मार्च विश्व रंगमंच दिवस के मौके पर वाराणसी की प्रतिष्ठित सेतु सांस्कृतिक केंद्र की ओर से नाट्य क्षेत्र में योगदान देने के लिए धनबाद के रंगकर्मी व पत्रकार बलवंत कुमार को राष्ट्रीय सेतु सम्मान प्रदान किया गया। वाराणसी के नगरी नाटक मंडली थिएटर हॉल में आयोजित 16वें राट्रीय नाट्य आंदोलन के दौरान पद्मश्री राजेश्वर आचार्य ने उन्हें अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र, और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। कोयलांचल में रंगमंच को दी एक नई पहचान बलवंत कुमार को…

Read More

Posted in झारखंड, साहित्य Comments Off on धनबाद के रंगकर्मी बलवंत को बनारस में मिला राष्ट्रीय सेतु सम्मान, लोगों ने दी बधाई
भारतीय सेना ने दिनकर की कविता के जरिए बताई अपनी मंशा
भारतीय सेना ने दिनकर की कविता के जरिए बताई अपनी मंशा

भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकाने में हमले के कुछ ही घंटे बाद ही सेना ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता ‘शक्ति और क्षमा’ का एक अंश ट्वीट किया है। आइए पढ़ते हैं राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पूरी कविता।। शक्ति और क्षमा/रामधारी सिंह दिनकर क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल सबका लिया सहारा पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे कहो, कहाँ, कब हारा?   क्षमाशील हो रिपु-समक्ष तुम हुये विनत जितना ही दुष्ट कौरवों ने तुमको कायर समझा उतना ही।   अत्याचार सहन करने का कुफल यही होता है…

Read More

कवि के मन में चल रहे अंतर्द्वंद से निकली वाणी

“मैं एक समन्दर हूँ” श्री रामकुमार सिन्हा मौन मेरे मन का   मैं प्रश्न बन जाऊ अगर उत्तर बनोगे तुम? मौन मेरे मन का मुझसे पूछता है।   मौन के कुछ पूछने का बहन तक मुझको नहीं था, किन्तु मैं यह जनता हूँ मौन जब कुछ बोलता है, शब्द से ही तौलता है मेरा भारी मन।   और मैं बस मूक होकर ताकता हूँ दूर तक यूँ।   मौन का वह प्रश्न तिरता शून्य में है।   चाहता हूँ मौन के हर प्रश्न का उत्तर बनूँ मैं, पर नहीं कुछ…

Read More

कविताओं के माध्यम से रामकुमार सिन्हा के मन के उद्गार
कविताओं के माध्यम से रामकुमार सिन्हा के मन के उद्गार

“तुम” श्री रामकुमार सिन्हा ऋषभ हूँ, गंधार हूँ, मध्यम हो तुम। राग का आलाप मैं, सरगम हो तुम।         गंगा-जमन की धार तुम,बंजर जमीं मैं।   तुम सुरीली तान केवल बाँसुरी मैं।        तुम हो शीतल चाँद, मैं दोपहर हूँ।         मैं घना कुहरा मगर शबनम हो तुम।        राग का आलाप मैं, सरगम हो तुम।        मैं धधकती लौ,दीये की आरती तुम।     राही मैं प्यासा हूँ, चंचल नदी तुम।         मैं हूँ झंझावात, हवा हो तुम बसंती।       प्रेम का प्रतिरूप मैं, रूपम हो तुम।     राग का आलाप मैं, सरगम हो तुम।…

Read More

गिरिडीह की साहित्यिक बिरादरी ने नामवर सिंह को किया नमन, दी श्रद्धांजलि
गिरिडीह की साहित्यिक बिरादरी ने नामवर सिंह को किया नमन, दी श्रद्धांजलि

वक्ताओं ने कहा – नामवर की परंपरा हमेशा रहेगी कायम गिरिडीह। गिरिडीह की साहित्यिक बिरादरी के लोगों ने दिवंगत साहित्यकार नामवर सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। स्थानीय पशुपालन विभाग के सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में गिरिडीह की विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं के सदस्यों ने भाग लिया। श्रद्धांजलि सभा का संचालन रितेश सराक ने और धन्यवाद ज्ञापन शंकर पांडेय ने किया। इसे भी पढ़ें-प्रशिक्षण के नाम पर खानापूर्ति करता है समाज कल्याण विभाग, ICDS कर्मियों का आरोप कृष्णा सोबती व अर्चना वर्मा को भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सबसे पहले उपस्थित लोगों…

Read More

गिरिडीह : 24 को होगा एक दिवसीय शास्त्रीय संगीत समारोह
गिरिडीह : 24 को होगा एक दिवसीय शास्त्रीय संगीत समारोह

गिरिडीह। गुरू बीरेन्द्र नारायण सिंह की स्मृति में आगामी 24 फरवरी को स्थानीय विजय इन्स्च्यूट में एक दिवसीय शास्त्रीय संगीत समारोह का आयोजन किया जाएगा। संगीत विद्या मंदिर के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कलाकार भाग लेंगे। समारोह का उदघाटन अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त  संगीतज्ञ पंडित शंभू दयाल केडिया द्वारा किया जाएगा। इसे भी पढ़ें-गिरिडीह : एसीबी धनबाद की टीम पहुंची सदर अस्पताल मूर्धन्य कलाकारों का होगा जुटान एक दिवसीय समारोह में कई मूर्धन्य कलाकारों का जुटान होगा। मिली जानकारी के अनुसार पंडित सुप्रीयो…

Read More

जवानों की शहादत पर भारत के पुरुषार्थ को ललकारती साक्षी की वाणी
जवानों की शहादत पर भारत के पुरुषार्थ को ललकारती साक्षी की वाणी

हे भारत        साक्षी कुमारी हे भारत त्रिनेत्र खोलो। मौन हो क्यों कुछ तो बोलो।। रक्त की बहती है सरिता, रामायण छोड़ो, आरंभ करो गीता, तुम राम भी, मर्यादा का अनुपम रूप तुम शिव भी, रूद्र का भयंकर स्वरूप तुम शारदा भी ज्ञान देते हो, तुम कालिका भी, तलवार अपनी तान देते हो तुम वो कृष्ण हो जो मधुर वंशी बजाते हो तुम वो विष्णु भी जो अर्जुन को धर्म का उपदेश सुनाते हो कोई शायद तुम्हारी सुनता नहीं है पर जब अस्त्र तुम्हारे कहने लगे तो सारे…

Read More

जादोपटिया और सोहराई कला से सजने लगी हैं गिरिडीह की दीवारें
जादोपटिया और सोहराई कला से सजने लगी हैं गिरिडीह की दीवारें

चित्रकार फिरोज ने शहर की दीवारों को बनाया पेंटिंग कैनवास रितेश सराक गिरिडीह। गिरिडीह शहर की दीवारों को सुंदर चित्रकारी से सजाया जा रहा है। शहर के मुख्य मार्गों से लगी दीवारों पर झारखंड की लोक चित्रकारी कला को उकेरा जा रहा है। झारखंड की प्रसिद्ध आदिवासी कला जादोपटिया, सोहराई और कोहबर को गिरिडीह के स्थानीय चित्रकार खूबसूरती से उकेर रहे हैं। जिला प्रशासन ने शुरू की पहल गौरतलब है कि झारखंड हजारीबाग समेत कई जिलों के मुख्य भवनों और पहुंच मार्गों से लगी दीवारों को राज्य की लोक चित्रकारी…

Read More

पुलवामा के शहीद जवानों को शब्दांजलि दे रहे हैं आबिद अंजुम
पुलवामा के शहीद जवानों को शब्दांजलि दे रहे हैं आबिद अंजुम

नमन वतन के जां निसारों को         आबिद अंजुम   नमन है वीर शहीदों को वतन के जां निसारों को करेंगे नाकाम हम मिलकर दुश्मन के नापाक इरादों को। न्योछावर जान को कर दी वतन की शान की खातिर, चलो कुछ करते हैं हम भी उनकी शान की खातिर। बहा जो खून है उनका वो समझो कर्ज है हम पर, रखी है शान मुल्क की अपने प्राण को देकर। जरा उन माओं को देखो जिनका लाल खोया है, धुली है मांग बहनों की छीना मासूमों का साया…

Read More

Posted in झारखंड, साहित्य Comments Off on पुलवामा के शहीद जवानों को शब्दांजलि दे रहे हैं आबिद अंजुम